रांची: बिहार में हार में चित्तौड़गढ़ के नाम से मशहूर औरंगाबाद और नवीनगर की राजनीति में बड़ा उलटफेर हो गया है। दोनों जगह से बाहरी उम्मीदवार को टिकट मिल गया। जबकि स्थानीय नेता देखते रह गए। शतरंज की चाल से स्थानीय नेता मात खा गए।
     भाजपा ने औरंगाबाद से रोहतास के रहने वाले गोपाल नारायण सिंह के बेटे त्रिविक्रम सिंह को उम्मीदवार बनाया है और अब नवीनगर से जदयू ने आनंद मोहन के बेटे और शिवहर के विधायक चेतन आनंद को टिकट दे दिया। चेतन आनंद भी बाहरी उम्मीदवार हैं। यानी चित्तौड़गढ़ की दो महत्वपूर्ण सीटों पर बाहरी उम्मीदवार। जबकि औरंगाबाद और नवीनगर में भाजपा और जदयू के पास कई बड़े नेता हैं। नवीनगर से वीरेंद्र सिंह कई बार विधायक रह चुके हैं।
कद्दावर नेताओं के रहते हुए भी बाहरी उम्मीदवारों को किस परिस्थिति में और किस वजह से टिकट दिया गया यह तो दोनों पार्टी के आला नेता ही बताएंगे। लेकिन दोनों जगहों पर बाहरी उम्मीदवारों का भारी विरोध है। इसका असर चुनाव परिणाम पर देखने को मिल सकता है क्योंकि दूसरे दलों के उम्मीदवार स्थानीय हैं। यहां बाहरी भीतरी का मुद्दा जोर पकड़ चुका है। क्योंकि चित्तौड़गढ़ की पहचान और अस्मिता का सवाल उठ खड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार चेतन आनंद शिवहर से ही चुनाव लड़ना चाहते थे। पिछले हफ्ते चेतन आनंद के पिता आनंद मोहन ने कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर शिवहर से ही चेतन के चुनाव लड़ने की घोषणा की थी। तैयारी भी यहीं से चल रही थी। उन्होंने नवीनगर से टिकट मांगा भी नहीं था। इच्छा भी नहीं थी। लेकिन अब अचानक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके रणनीतिकारों ने शिवहर से श्वेता गुप्ता को टिकट देकर चेतन आनंद को नवीनगर भेज दिया। नवीनगर से एक बार चेतन आनंद की मां लवली आनंद भी चुनाव लड़ चुकी हैं।
टिकट बंटवारे का असर अभी से ही औरंगाबाद और नवीनगर में दिखने लगा है । विरोध तेज है। शिवहर से नवीनगर भेजे जाने पर तत्काल चेतन आनंद और आनंद मोहन की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।

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