रांची: पटना के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी चयन के मामले में हुई चूक से भाजपा की भारी किरकिरी और फजीहत हुई है. बांकीपुर कोई सामान्य सीट नहीं है. यह राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन की पारंपरिक सीट है और इस सीट पर प्रत्याशी अभिषेक सिन्हा बंटी के नाम की घोषणा से पहले बंटी की पारिवारिक पृष्ठभूमि की स्क्रीनिंग ठीक से नहीं हुई.
बंटी नितिन नबीन की पसंद के उम्मीदवार थे, फिर भी ऐसी चूक कैसे हुई यह बड़ा सवाल है. बंटी भाजपा के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता हैं इसमें कोई दो राय नहीं. लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि दागदार है. इसकी खबर मिलते ही भाजपा में खलबली मच गई. पटना से दिल्ली तक हड़कंप मच गया.
पार्टी ने फौरन बंटी की उम्मीदवारी वापस ली. धूमधाम से नॉमिनेशन के बाद उनको हटाया गया. बंटी ने एक कार्यकर्ता की तरह विद्रोह नहीं किया बल्कि पार्टी के फैसले को स्वीकार किया और खुद हटने का ऐलान कर दिया.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चारा घोटाले में बंटी के पिता रविंद्र प्रसाद,पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ प्रसाद मिश्र के साथ-साथ जो कई आरोपी थे इनमें इनका भी नाम था. इनको सजा भी हुई थी. बंटी ने अंतरजातीय शादी भी की है.
बंटी के परिवार के चारा घोटाले में शामिल होने का पता चलते ही भाजपा में सनसनी फैल गई. प्रशांत किशोर इस मामले को जोर-जोर से उठाने वाले थे. यह चुनावी मुद्दा बन जाता. भाजपा को जवाब देते नहीं बनता. क्योंकि भाजपा ने चारा घोटाले का सबसे अधिक विरोध किया और इसके नेताओं ने ही इसे उजागर किया था. ऐसे में पार्टी के पास कोई जवाब नहीं था, इसलिए बंटी की उम्मीदवारी वापस ली गई.
बंटी के बाद दूसरे घोषित प्रत्याशी नीरज सिन्हा के मामले में भी पार्टी की किरकिरी हुई. नीरज के बायोडाटा में यह बताया गया कि इनका जन्म 1994 में हुआ है और 2006 में भाजपा के प्राथमिक सदस्य बन गए. इस बायोडाटा पर भी सवाल उठा कि 12 साल में नीरज कैसे भाजपा के सदस्य बन गए. बवाल हुआ तो पार्टी ने बायोडाटा बदला और इस मामले को दबाने की कोशिश की.
अब सवाल उठता है कि बांकीपुर जैसे सीट के लिए उम्मीदवार के चयन में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई. पार्टी के रणनीतिकारों ने प्रत्याशी की कैसे स्क्रीनिंग की. इस मामले में भाजपा के साथ-साथ नितिन नबीन की भी किरकिरी हुई है. प्रत्याशी के चयन के मामले पर भाजपा को बैकफुट पर आना पड़ा.











