Location: Garhwa
गढ़वा जिला मुख्यालय स्थित रंका मोड़ के संकट मोचन मंदिर से रविवार को संस्कार भारती, झारखंड प्रांत द्वारा आयोजित कला धरोहर यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह यात्रा सदर प्रखंड के ढोंटी गांव स्थित ऐतिहासिक स्थल रक्सैल राज तक पहुंची, जिसमें बड़ी संख्या में कला प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत में संस्कार भारती झारखंड प्रांत के कला धरोहर संयोजक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपनी कला और परंपराओं को नहीं पहचानेंगे, तब तक सांस्कृतिक समृद्धि अधूरी रहेगी।
रक्सैल राज के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए एकल अभियान के गढ़वा जिला सचिव सियाराम शरण वर्मा ने कहा कि यह क्षेत्र प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां आने वाले लोगों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला है, जो आज समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
समाजसेवी डॉ. पातंजलि कुमार केशरी ने कहा कि देश के विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जन-जन को जोड़ना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करते हैं।
संस्कार भारती गढ़वा जिला इकाई के मंचीय कला संयोजक प्रेम दीवाना व्यास ने बताया कि रक्सैल राज का इतिहास लगभग चौदहवीं शताब्दी पुराना है और यह क्षेत्र प्रकृति संरक्षण के लिए भी जाना जाता रहा है। उन्होंने कहा कि इस गौरवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इस तरह के आयोजनों की जरूरत है।
पलामू विभाग प्रमुख डॉ. शंभु कुमार तिवारी ने कहा कि संस्कार भारती सदैव भारतीय संस्कृति, कला और साहित्य के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रही है और यह यात्रा सांस्कृतिक चेतना जगाने का सशक्त माध्यम बनेगी।
सामाजिक कार्यकर्ता मुरली श्याम तिवारी ने कला को समाज का दर्पण बताते हुए इसके संरक्षण पर बल दिया। वहीं कला साधिका संध्या सुमन ने कहा कि कला केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि साधना और संस्कृति के प्रति समर्पण का माध्यम है।
इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार गढ़वा के न्याय मित्र अरविंद कुमार तिवारी, रमाशंकर चौबे, तृप्ता भानु, रवींद्र यादव, रवींद्र पाठक, कृष्णानंद दुबे, अमोद कुमार सिन्हा और सौम्या सुमन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यह कला धरोहर यात्रा सांस्कृतिक जागरूकता का प्रतीक बनी और लोगों को अपनी समृद्ध परंपरा एवं विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा दी।











