Location: Garhwa
आदरणीय मंचासीन अतिथिगण,
सम्मानित साहित्यकारों,
मेरे सभी नव-नियुक्त साथियों एवं उपस्थित साहित्य-प्रेमी बंधुओं,
आज का दिन मेरे लिए अत्यंत गौरव और जिम्मेदारी का दिन है।
गढ़वा जिला इकाई, अखिल भारतीय साहित्य परिषद की इस नई कमेटी का गठन केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक नई साहित्यिक यात्रा की शुरुआत है।
मैं अपनी बात एक पंक्ति से प्रारंभ करना चाहूँगा—
“जहाँ शब्द जागते हैं, वहीं समाज आगे बढ़ता है।”
आज मुझे जो अध्यक्ष का दायित्व सौंपा गया है, उसे मैं पद नहीं, बल्कि सेवा और साधना मानता हूँ।
एक साहित्य प्रेमी होने के नाते, मैं यह प्रयास करूँगा कि इस विश्वास को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभा सकूँ।
यह कमेटी क्या है?
यह सिर्फ कुछ पदों का समूह नहीं है—
यह विचारों का परिवार है,
यह रचनात्मकता का मंच है,
और यह गढ़वा की साहित्यिक आत्मा का प्रतिबिंब है।
हमारी प्राथमिकताएँ स्पष्ट हैं— छुपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाना
युवाओं को साहित्य से जोड़ना स्थानीय लेखकों को मंच देना
और गढ़वा की साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना
हमारी त्रैमासिक कार्य योजना भी इसी सोच को आधार बनाकर तैयार की गई है—
जहाँ हम पहचान से प्रदर्शन, और प्रशिक्षण से प्रकाशन तक की पूरी यात्रा तय करेंगे।
लेकिन मैं यहाँ एक बात विशेष रूप से कहना चाहूँगा—
कोई भी अध्यक्ष अकेले सफल नहीं होता,
सफलता हमेशा टीम की होती है।
इसलिए मैं अपने सभी साथियों से कहना चाहता हूँ—
हम सब मिलकर इस परिषद को एक नई ऊँचाई देंगे।
हर सदस्य की भूमिका महत्वपूर्ण है, हर विचार मूल्यवान है।
अंत में, मैं अपनी बात एक प्रेरणादायक पंक्ति के साथ समाप्त करना चाहूँगा—
“कलम जब सच्चाई लिखती है, तो इतिहास बन जाता है।”
आइए, हम सब मिलकर ऐसा साहित्य रचें,
जो समाज को दिशा दे, प्रेरणा दे, और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त करे।
आप सभी के सहयोग और सुझावों की अपेक्षा के साथ—
बहुत-बहुत धन्यवाद











