रांची: राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार को लेकर इंडिया गठबंधन के दो दलों झामुमो-कांग्रेस में तनातनी बढ़ गई है. यदि यही स्थिति रही तो गठबंधन टूट सकता है और झारखंड में सत्ता का समीकरण बदल सकता है.
कांग्रेस की ओर से गुरुवार की रात उम्मीदवार की घोषणा के बाद शुक्रवार को झामुमो के तेवर कड़े हो गए. मुख्यमंत्री आवास पर विधायकों की आपात बैठक हुई. बैठक में शामिल अधिकांश विधायकों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि दोनों सीटों पर झामुमो को कैंडिडेट देना चाहिए. कांग्रेस ने दबाव की राजनीति के तहत उम्मीदवार की घोषणा कर दी है. इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए. पार्टी चाहती है कि दोनों सीटों पर अपना उम्मीदवार हो. पार्टी के विधायकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया.
पूर्व मंत्री बैजनाथ राम ने मीडिया के सामने भी कहा कि झामुमो दोनों सीटों पर चुनाव लड़ेगा. झामुमो के तेवर से इंडिया गठबंधन पर टूट का खतरा मंडराने लगा है. यदि पार्टी दोनों सीटों पर उम्मीदवार देती है तो गठबंधन का टूटना लगभग तय है.
इधर, कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री से वार्ता और आश्वासन मिलने के बाद ही पार्टी ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है. जबकि झामुमो का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 5 जून की शाम तक समय की मांग की थी. लेकिन कांग्रेस ने झामुमो पर दबाव बनाने के उद्देश्य से एक तरफा उम्मीदवार की घोषणा कर दी. उम्मीदवार की घोषणा के बाद से झामुमो खेमे में नाराजगी और खलबली है. मुख्यमंत्री भी नाराज बताए जा रहे हैं. इसलिए उन्होंने आपात बैठक बुलाई थी. विधायकों ने कांग्रेस के रवैय पर आपत्ति जताते हुए दोनों सीटों पर उम्मीदवार देने का फैसला लिया.
यदि झामुमो दोनों सीटों पर उम्मीदवार देता है तो गठबंधन का टूटना तय हो जाएगा. यदि गठबंधन टूटता है तो फिर झारखंड में सत्ता का नया समीकरण बनेगा. दूसरी सीट के लिए झामुमो के पास भी आंकड़ा नहीं है. ऐसे में झामुमो क्या रणनीति अपनाती है यह देखना होगा. कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने दूसरे प्रत्याशी के लिए वोटों का जुगाड़ कहां से करते हैं. यह देखना महत्वपूर्ण होगा. क्या कांग्रेस टूट जाएगी या फिर भाजपा के साथ कोई समीकरण बनेगा सभी संभावनाओं के द्वार खुले हुए हैं. कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा रांची पहुंच चुके हैं और वह रणनीति बनाने में जुट गए हैं. रात तक मुख्यमंत्री से भी मिलने की संभावना है. कांग्रेस प्रभारी के राजू रांची में ही जमे हुए हैं.
मैं पिछले 6 महीने से यह लिख रहा हूं कि राज्यसभा चुनाव झारखंड की राजनीति के लिए टर्निंग पॉइंट्स हो सकता है. अब राजनीति लगभग उसी दिशा की ओर बढ़ रही है.
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