Location: Garhwa
गढ़वा। झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जारी आंदोलन के बीच सरकार से संवेदनशील पहल और सार्थक संवाद की मांग की है। संघ ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि राज्य के मनरेगा कर्मी पिछले लगभग तीन महीनों से अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या बाहरी प्रभाव का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों से उपेक्षा और असमानता का सामना कर रहे हजारों मनरेगा कर्मियों की पीड़ा का परिणाम है।
संघ ने कहा कि हाल के दिनों में आंदोलन को अनुचित ठहराने और कर्मियों की मंशा पर सवाल उठाने का प्रयास किया गया है, जबकि यह आंदोलन सरकार के विरोध में नहीं, बल्कि सम्मानजनक सेवा शर्तों, सामाजिक सुरक्षा और न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। संघ के अनुसार राज्य मनरेगा कोषांग में कार्यरत कर्मियों को ग्रेड-पे जैसी सुविधाएं मिल रही हैं, जबकि क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत हजारों कर्मी आज भी मात्र 12 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर पूर्णकालिक सेवा देने को विवश हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मनरेगा कर्मी सरकार और विभागीय अधिकारियों को अपना अभिभावक मानते हैं और टकराव नहीं बल्कि न्याय और संवेदनशीलता की अपेक्षा रखते हैं। संघ ने सवाल उठाया है कि वर्तमान समय में 12 हजार रुपये मासिक मानदेय पर किसी परिवार का सम्मानजनक जीवन-यापन संभव नहीं है। साथ ही बताया गया कि वर्षों की सेवा अवधि में 156 मनरेगा कर्मियों का निधन हो चुका है और उनके परिवार आज भी आर्थिक व सामाजिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।
संघ ने कहा कि अतीत में कई बार सरकार और कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच लिखित समझौते हुए, मांगों पर सहमति बनी और आश्वासन भी दिए गए, लेकिन उनका पूर्ण क्रियान्वयन नहीं हो सका। इसी कारण कर्मचारियों के बीच विश्वास का संकट उत्पन्न हुआ है। इसके बावजूद मनरेगा कर्मी संवाद के रास्ते पर भरोसा रखते हैं।
संघ ने ग्रामीण विकास मंत्री, विभागीय सचिव और आयुक्त से अपील करते हुए कहा है कि आंदोलन को केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी देखा जाए। साथ ही मंत्री से कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ सार्थक एवं परिणामोन्मुखी वार्ता सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है ताकि वर्षों से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सके।
संघ ने स्पष्ट किया है कि मनरेगा कर्मी सरकार से संघर्ष नहीं, बल्कि समाधान चाहते हैं। उनका उद्देश्य विशेषाधिकार प्राप्त करना नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और न्यायपूर्ण सेवा व्यवस्था सुनिश्चित कराना है। संघ का कहना है कि मनरेगा को मजबूत बनाने के लिए मनरेगा कर्मियों को मजबूत बनाना आवश्यक है, जो राज्यहित, जनहित और ग्रामीण विकास के लिए भी जरूरी है।