Location: Garhwa
गढ़वा: जेटेट परीक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को हटाए जाने के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी रितेश चौबे ने राज्य की झामुमो सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए कड़ा प्रहार किया है।
रितेश चौबे ने कहा कि जेटेट परीक्षा से हिन्दी, मगही, भोजपुरी और अंगिका जैसी प्रमुख भाषाओं को हटाना सीधे तौर पर झारखंड के युवाओं के साथ भेदभाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन की सरकार पहले भी इस तरह के फैसले लेकर छात्रों के साथ अन्याय कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि झारखंड की आधे से अधिक आबादी इन भाषाओं को बोलती और समझती है, खासकर पलामू प्रमंडल और गढ़वा जैसे क्षेत्रों में ये भाषाएं प्रमुख हैं। ऐसे में इन भाषाओं को परीक्षा से हटाना लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाला कदम है।
भाजपा नेता ने इसे आम जनता का अपमान बताते हुए कहा कि सरकार जानबूझकर क्षेत्रीय युवाओं के साथ अन्याय कर रही है। इस फैसले से छात्रों और युवाओं में भारी नाराजगी और निराशा का माहौल है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी और झामुमो इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, जो उनकी “भेदभाव की राजनीति” को दर्शाता है।
रितेश चौबे ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया, तो छात्रों, युवाओं और आम जनता के साथ मिलकर आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ अन्याय किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।











