
Location: रांची
रांची: झारखंड में भाजपा बिना सीएम फेस घोषित किए चुनाव लड़ रही है. पार्टी ने एक रणनीति के तहत ऐसा किया है. भाजपा ने मध्य प्रदेश, छतीसगढ़ व राजस्थान के चुनाव में भी ऐसा ही किया था. सीएम फेस घोषित करने पर गुटबाजी का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए केंद्रीय नेतृत्व इससे बचता रहा है. झारखंड में भी इसी रणनीति के तहत किसी का नाम सीएम के लिए घोषित नहीं किया गया. लेकिन धनवार में हुई राजनीतिक घटनाक्रम सीएम फेस को लेकर कुछ संकेत दे रहा है. जिसे समझने की जरूरत है. यहां से प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी चुनाव लड़ रहे हैं. चुनाव से पूर्व तक भाजपा के करीबी रहे इलाके के बड़े ठेकेदार निरंजन राय जब बागी बनकर निर्दलीय चुनाव मैदान में कूद गए तो भाजपा में खलबली मच गई. नामांकन के पहले निरंजन राय को मनाने की पूरी कोशिश हुई. गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे उनके घर तक गए. लेकिन निरंजन राय नहीं माने. हाथ जोड़ दिया.
मैं पहले बता चुका हूं कि निरंजन राय किसके इशारे पर चुनाव लड़ रहे थे. इसके पीछे की रणनीति क्या थी. पर्दे के पीछे कौन लोग थे. फिर से इसकी चर्चा करने ठीक नहीं है.
निरंजन राय के चुनाव मैदान में डटे रहने से बाबूलाल मरांडी की मुश्किलें बढ़ गई थी. क्योंकि भाजपा के आधार वोट में निरंजन राय सेंधमारी कर रहे थे. वोट बंट रहा था. बड़े ठेकेदार हैं. पैसे वाले हैं. प्रचार के दौरान भी पैसे के साथ-साथ उनका प्रभाव दिख रहा था. इसलिए भाजपा परेशान थी. बाबूलाल के मामले में भाजपा नेतृत्व कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था. इसलिए आपरेशन निरंजन राय अंदर ही अंदर चलता रहा. सांसद निशिकांत दुबे, कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र राय, बाबूलाल के निजी सचिव राजेंद्र तिवारी आदि आपरेशन में लगे रहे. यह आपरेशन गृहमंत्री अमित शाह, चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, असम के मुख्यमंत्री व चुनाव सह प्रभारी हिमंता विस्व सरमा की जानकारी में चल रहा था. मुख्य भूमिका निशकांत दुबे ने ही निभाई. निरंजन राय पर चारों तरफ से दबाव पड़ा.
निरंजन राय बड़े ठेकेदार हैं. अरबों की संपित्त के मालिक हैं. भविष्य में परेशानी हो सकती थी. इसलिए नफा-नुकसान का आकलन कर निरंजन राय भाजपा में लौट आए. चुनाव मैदान से हट गए. राय के मैदान से हटते ही धनवार में बाबूलाल मरांडी की राह आसान हो गई. रास्ते के कील-कांटे निकल गए.
आपरेशन निरंजन राय को अंजाम तक पहुंचाया हिमंता सरमा ने. अमित शाह के टास्क को हिमंता ने पूरा कर दिया. धनवार में अमित शाह की सभा से कुछ घंटे पहले हिमंता व निशिकांत निरंजन राय को लेकर उड़ गए. अमित शाह से बात कराई और उनकी सभा में निरंजन राय को भाजपा में शामिल करा दिया.
निरंजन राय को मनाने को लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से जिस तरह आपरेशन चलाया गया इससे संकेत मिलता है कि बाबूलाल मरांडी के चुनाव जितने के मामले में पार्टी ने कोई रिस्क नहीं लिया. बाबूलाल को अकेले नहीं छोड़ा गया. पूरी पार्टी उनके साथ खड़ी रही. निरंजन राय व बाबूलाल के मामले में राजनीतिक संकेत तो यही है कि मरांडी सीएम फेस हैं. रेस में सबसे आगे हैं. भले ही अधिकारिक रूप से उनके नाम की घोषणा नहीं हुई है, पर नंबर एक पर वहीं हैं. इसलिए अमित शाह की जानकारी व निर्देश पर आपरेशन निरंजन राय को अंजाम दिया गया.
हालांकि भाजपा कब क्या फैसला लेगी यह कहना कठिन है. मोदी व अमित शाह की जोड़ी अब तक हमेशा अपने फैसले से चौंकाती रही है. इसलिए झारखंड के मामले में भी अभी इंतजार करना पड़ेगा. चुनाव परिणाम आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी.