राजनीति में नई मिसाल बनें निशांत , क्या कोई नेता पुत्र सीख लेगा


  रांची : राजनीति और सत्ता में जब बड़े नेताओं के बेटे  बेटियां व परिवार के अन्य सदस्य पद हथियाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं तो ऐसे में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने पार्टी की ओर से भारी दबाव के बावजूद मंत्री बनना स्वीकार नहीं किया। एक महीने से यह खबर चल रही थी कि वह उप मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। निशांत ने पद ठुकरा दिया। ऐसा कर वह देश में उदाहरण बन गए। राजनीति में सुचिता और ईमानदारी की मिसाल पेश की। जता दिया कि उनको सत्ता और मंत्री पद का लोभ नहीं है।
  उन्होंने साफ-साफ कहा कि वह अभी किसी  सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए मंत्री नहीं बनेंगे। बिहार की राजनीति को समझेंगे। जनता के पास जाएंगे। संवाद करेंगे, फिर आगे निर्णय लेंगे। आज की राजनीति में ऐसा उदाहरण कहां मिलता है। यह एक अद्भुत और सराहनीय फैसला है। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगी। नीतीश ने भी निशांत पर दबाव नहीं बनाया। इस तरह राजनीति में पिता और पुत्र दोनों मिसाल बन गए।
बिहार में ही एनडीए के घटक दल के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कैसे अपने बेटे दीपक प्रकाश को अचानक प्रस्तुत कर मंत्री बनवा दिया था। वह  फिर से मंत्री बनेंगे। यह भी देश और बिहार ने देखा है।
   देश की राजनीति में परिवारवाद किस तरह हावी है यह कहने की जरूरत नहीं है। सबको पता है कि नेता सिर्फ अपने परिवार को आगे बढ़ते हैं। लेकिन नीतीश इसके उदाहरण बन गए। क्या कोई निशांत कुमार से सबक लेगा। इसकी उम्मीद ही बेमानी है। राजनीति का स्तर जब पूरी तरह गिर गया है तब निशांत की राजनीतिक यात्रा पर चर्चा जरूरी है।
   निशांत का रहन-सहन भी बिल्कुल अलग है। नीतीश की तरह उन्हें भी सादगी पसंद है। राजनीति में वह आना नहीं चाहते थे परिस्थिति वश राजनीति में आए हैं। जब राजनीति में आ गए हैं तो उन्होंने मिसाल बनना ही बेहतर समझा। इसी बिहार में लालू यादव ने कैसे अपने बेटे- बेटियों को राजनीति में स्थापित किया है यह भी सबने देखा है। आखिर ऐसे ही कोई नीतीश नहीं बन जाता है।

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  • Sunil Singh

    Sunil Singh is Reporter at Aapki khabar from Ranchi, Jharkhand.

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