Location: Garhwa
गढ़वा। सोमवार की शाम बंधन मैरेज हॉल, नवादा मोड़, गढ़वा के प्रांगण में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की गढ़वा जिला इकाई का गठन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत माँ शारदे के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर इस संगठन के झारखंड प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यनारायण तिवारी, प्रदेश मंत्री चंद्रकांत सिंह, पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. संजीव मिश्र ‘राजन’, पलामूं जिला इकाई के अध्यक्ष उमेश पाठक ‘रेणु’ तथा पलामूं जिला इकाई के सचिव विजय शंकर मिश्र सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
नवगठित कमेटी में विवेकानंद उपाध्याय को अध्यक्ष तथा प्रमोद कुमार को सचिव बनाया गया। इसके अलावा धर्मेंद्र कुमार ‘पुष्कर’, जयपूर्णा विश्वकर्मा एवं सोनू पांडे को उपाध्यक्ष, अमरेंद्र तिवारी को संयुक्त सचिव, नीरज मलिक को सह सचिव, गोपाल राम को कोषाध्यक्ष तथा राजीव रंजन तिवारी, परशु राम, सौरभ कुमार तिवारी, संध्या सुमन और सुशील कुमार मिश्र को कार्यकारिणी का सदस्य मनोनीत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन दो सत्रों में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र परिचयात्मक रहा, जिसका संचालन प्रमोद कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अध्यक्ष विवेकानंद उपाध्याय ने किया। इस दौरान अतिथियों एवं नवगठित पदाधिकारियों को पुष्प माला एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। परिषद् की ओर से वार्षिक कार्य योजना का प्रस्तुतीकरण भी किया गया।
अपने संबोधन में प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यनारायण तिवारी ने कहा कि परिषद का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय भावना एवं भारतीय संस्कृति का संरक्षण करते हुए समाज में साहित्यिक प्रतिभाओं को पहचानना और उन्हें प्रोत्साहित करना है। प्रदेश मंत्री चंद्रकांत सिंह ने गढ़वा इकाई के गठन को साहित्य के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल बताते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की। डॉ. संजीव मिश्र ‘राजन’ ने परिषद के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु समर्पित संगठन बताया। विजय शंकर मिश्र ने कहा कि परिषद निरंतर राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। सौरभ तिवारी ने अपनी रचना “हम सपूत हैं भारत माँ के” सुनाकर उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रप्रेम का संचार किया। धर्मेंद्र कुमार ‘पुष्कर’ ने वर्तमान पीढ़ी और पारिवारिक मूल्यों पर आधारित गीत के माध्यम से सामाजिक पीड़ा को अभिव्यक्त किया। “चिंगारी रख” नामक ओजपूर्ण कविता के माध्यम से नीरज मलिक ने उपस्थित लोगों में जोश भरने का काम किया। जयपूर्णा विश्वकर्मा ने “ऋतु बिखर रहा है मनभावन” गीत प्रस्तुत किया, वहीं अवकाश प्राप्त शिक्षक योगेंद्र सिंह ने भोजपुरी चैता “राम जी के भईले जनमवा हो रामा चैत महीनवा” गाकर खूब वाहवाही लूटी। डॉ. टी. पियुष ने “कर्म की याद” तथा “प्रथम अनुभव प्रेम का” कविता सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। द्वितीय सत्र के कार्यक्रम का संचालन कर रहे नीरज श्रीधर ने “32 वर्षों के बाद पंचायती राज आया है” कविता के माध्यम से व्यवस्था पर व्यंग्य किया। उमेश पाठक ‘रेणू’ ने “खोजते सब जा रहे हैं राम और रहमान को” गजल के जरिए सांप्रदायिक सोच पर प्रहार किया। “मेरे बलमा गए रे दूर देश, बता दो सखी मैं क्या करूँ” के माध्यम से चंद्रकांत सिंह के द्वारा एक विरहन की पीड़ा को व्यक्त करने का कार्य किया गया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, स्थानीय बुद्धिजीवी एवं युवा उपस्थित रहे।











