Location: सगमा
गढ़वा के धुरकी थाना क्षेत्र के करवापहाड़ गांव में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और रिश्तों की बुनियाद पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस घर में शहनाइयों की गूंज होनी थी, वहां सन्नाटा और मातम पसरा है।
रविवार का दिन उस परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया, जब बेटी की शादी के दिन बारात ही नहीं पहुंची। पिता रिजवान अंसारी, जिनकी आंखों में बेटी की विदाई के सपने थे, अब उन्हीं आंखों में आंसू और इंसाफ की गुहार है। रोते-बिलखते वह थाने पहुंचे, ताकि अपनी बेटी के टूटे अरमानों का जवाब मांग सकें।
बताया जा रहा है कि दो महीने पहले बड़ी उम्मीदों के साथ यह रिश्ता तय हुआ था। शादी की तारीख 3 मई 2026 रखी गई थी। दहेज में एक लाख रुपये नकद, एक मोटरसाइकिल और अन्य सामान देने की बात भी मान ली गई थी। पिता ने अपनी हैसियत से बढ़कर एक लाख रुपये पहले ही दे दिए थे, ताकि बेटी की खुशियों में कोई कमी न रहे।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। शादी के दिन अचानक लड़के के पिता ने बारात लाने से साफ इंकार कर दिया। घर में मेहमान आ चुके थे, टेंट-सामियाना सज चुका था, हर कोना जश्न के लिए तैयार था—लेकिन दुल्हन की डोली उठने से पहले ही सब कुछ उजड़ गया।
पीड़ित पिता का आरोप है कि लड़के पक्ष ने आखिरी समय में उनकी पुश्तैनी जमीन अपने नाम करने की मांग रख दी और पहले से दिए गए पैसे लौटाने से भी मना कर दिया। यह सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वहीं, लड़के पक्ष की ओर से भी आरोप लगाए गए हैं कि कथित तौर पर उन्हें अपमानित किया गया, जिसके कारण उन्होंने रिश्ता तोड़ने का फैसला लिया। सच क्या है, यह अब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल, एक बेटी के सपने टूट चुके हैं, एक पिता का भरोसा बिखर चुका है, और एक परिवार गहरे सदमे में है।
👉 यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती है जहां आज भी दहेज जैसी कुप्रथा रिश्तों से बड़ी हो जाती है।











