विष्णुगढ़ कांड से उठते सवाल, अपराध की चर्चा कम, भाजपा की अधिक

Location: रांची

रांची : हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाने की कुसुंबा गांव में नाबालिग बच्ची की हत्या के मामले में पुलिस ने जो खुलासा किया है वह सचमुच हैरान कर देने वाली घटना है। मानवता और रिश्तों को तार-तार करने वाली। निंदा के लिए शब्द नहीं।
पुलिस के खुलासे के बाद कई सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। पहला सवाल आरोपी भीम राम को ले और दूसरा सवाल नरबलि को लेकर। भीम राम को भाजपा का कार्यकर्ता बताया गया। भाजपा का नाम आते ही तूफान खड़ा हो गया। असम में चुनावी मुद्दा बन गया। मुख्यमंत्री से लेकर भाजपा के तमाम विरोधी दलों के नेता भीम राम के बहाने भाजपा को टारगेट करने में जुट गए। जघन्य अपराध की चर्चा थम गई। इधर, भाजपा ने मोर्चा संभाला और सफाई दी कि भीम राम भाजपा का कार्यकर्ता नहीं है। पार्टी को बदनाम किया जा रहा है। भाजपा इस मामले में पूरी तरह डिफेंसिव हो गई। इसके सिवाय कोई उपाय भी नहीं था।
     भीम राम के भाजपा से जुड़े होने को लेकर कई तस्वीर वायरल है। जिसमें वह पार्टी के बड़े नेताओं के साथ दिख रहा है। गले में भाजपा का पट्टा पहना हुआ है। यह सच भी हो कि वह पदाधिकारी न हो लेकिन कार्यकर्ता है। लेकिन क्या पूरे मामले को भीम राम और भाजपा से जोड़कर देखा जाए। क्या इससे अपराध कम हो जाएगा।
अपराधी चाहे किसी पार्टी से जुड़ा हो वह अपराधी ही है। ऐसे हजारों लोग मिल जाएंगे जो किसी न किसी पार्टी से जुड़े रहते हैं और अंदर-अंदर अपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहते हैं। कोई पार्टी इससे अछूता नहीं है। इसलिए पार्टी से जोड़कर देखने के बजाय उसके अपराध और कारनामे को देखना चाहिए।
कोई पार्टी या उसका बड़ा नेता किसी को यह नहीं कहता कि तुम अपराध करो और पार्टी को बदनाम करो। हालांकि कुछ अपवाद हो सकता है। लाखों कार्यकर्ता और समर्थक होते हैं ऐसे में कौन किस पृष्ठभूमि का है पता करना मुश्किल होता है। जब मामले का खुलासा होता है तभी पता चलता है इसलिए फोकस भीम राम जैसे लोगों पर नहीं अपराध पर होना चाहिए।
दूसरा सवाल नरबलि को लेकर है। कुछ लोग और परिजन नरबलि की घटना को पुलिस की कहानी बता रहे हैं। झारखंड में ओझा- गुणी, नरबलि जैसी कुप्रथा गंभीर समस्या है। ऐसी घटनाएं अंधविश्वास और अशिक्षा के कारण होती हैं।
जैसा कि नाम है नरबलि यानी नर की बालि। इस मामले में बच्चों की बलि नहीं दी गई। गला नहीं काटा गया। बच्ची की मौत दम घुटने से हुई है। गला और नाक दबाने से बच्ची की मौत की पुष्टि हुई है। कहा गया कि सिर फाड़ कर खून चढ़ाया गया। बच्ची के गुप्तांग में छड़ी घुसाने की बात भी कही गई है। मामला जब नरबलि का है तो फिर छड़ी क्यों क्यों घुसाई गई। यह बिल्कुल अलग तरह का मामला है।
इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जरूरत है। ताकि संदेह की कोई गुंजाइश न रहे। घटना में शामिल सभी लोगों को जल्द से जल्द फांसी की सजा मिले। इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाना चाहिए। मैं फिर कहता हूं कि अपराधियों की कोई जाति और पार्टी नहीं होती। वह अपराध ही होते हैं और किसी पार्टी के साथ जुड़ जाने से अपराध कम नहीं हो जाता। इसलिए चर्चा अपराध और अपराधी की होनी चाहिए न कि किसी पार्टी की।

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  • Sunil Singh

    Sunil Singh is Reporter at Aapki khabar from Ranchi, Jharkhand.

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