Location: Meral
मेराल (गढ़वा)। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत विभिन्न विभागों के कर्मियों की प्रतिनियुक्ति कर कार्य कराया जा रहा है। इसी क्रम में मेराल प्रखंड के पिंडरा गांव की बीएलओ उमा देवी को भी एसआईआर कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब उनके द्वारा दर्ज कराए गए एक मामले में न्यायालय के समक्ष समझौता होने के बाद कई सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, 15 जुलाई को बीएलओ उमा देवी ने मेराल थाना में लिखित आवेदन देकर जिला परिषद सदस्य संजय कुमार सिंह एवं उनके सहयोगी पर सरकारी कार्य में बाधा डालने, एसआईआर फॉर्म फाड़ने, घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज, छेड़छाड़ तथा जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। आवेदन के आधार पर मेराल थाना कांड संख्या 177/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
बताया जाता है कि बीएलओ ने अपने आवेदन के साथ कथित रूप से फाड़े गए एसआईआर फॉर्म भी थाना में जमा कराए थे। हालांकि एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर मामले को आपसी लेन-देन एवं निजी विवाद बताते हुए समझौता कर लिया। इसके बाद यह प्रश्न उठने लगा है कि यदि मामला निजी विवाद था, तो सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और एसआईआर फॉर्म फाड़ने जैसे आरोप किस आधार पर लगाए गए थे।
इस घटनाक्रम के बाद अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या संबंधित विभाग और निर्वाचन आयोग इस मामले की विभागीय जांच कर कोई कार्रवाई करेंगे अथवा मामला यहीं समाप्त हो जाएगा।
थाना प्रभारी विष्णुकांत ने बताया कि बीएलओ उमा देवी ने आवेदन के साथ फाड़े हुए एसआईआर फॉर्म थाना में जमा किए थे। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के क्रम में बीएलओ का फिंगरप्रिंट भी लिया गया है तथा अनुसंधान जारी है।
वहीं अंचल अधिकारी यशवंत नायक ने बताया कि बीएलओ उमा देवी ने उन्हें जिला परिषद सदस्य द्वारा एसआईआर कार्य में अनैतिक कार्य कराने के लिए दबाव बनाने की जानकारी दी थी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि एसआईआर फॉर्म फाड़े जाने की कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई थी।
उल्लेखनीय है कि मामला अभी न्यायिक एवं पुलिस जांच के दायरे में है। ऐसे में आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण सक्षम न्यायालय और जांच एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर ही होगा। विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।











