Location: कांडी
“सरकारी आदेश का पालन कराने के बजाय बच्चों को बनाया जा रहा मोहरा : प्रखंड प्रमुख”
कांडी। राजकीयकृत जमा-दो उच्च विद्यालय कांडी के प्रभारी प्रधानाध्यापक मलय कुमार सिंह के प्रतिनियोजन और विरमण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। विभागीय आदेश के तहत मूल विद्यालय में विरमित किए जाने के बाद भी विरमण रोकने के लिए छात्र-छात्राओं को जिला मुख्यालय गढ़वा ले जाने का आरोप लगा है। देर रात बच्चे गढ़वा से कांडी लौटे। उस समय मूसलाधार बारिश हो रही थी। बारिश से बचने के लिए बच्चे विद्यालय परिसर में इधर-उधर जगह तलाशते रहे। मामले को लेकर प्रखंड प्रमुख सत्येंद्र कुमार पांडेय उर्फ पिंकू पांडेय ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए।
प्रखंड प्रमुख के अनुसार, मलय कुमार सिंह का प्रतिनियोजन राजकीय उत्क्रमित जमा-दो उच्च विद्यालय लवाही कला, डंडई से राजकीयकृत जमा-दो उच्च विद्यालय कांडी में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया था। कुछ दिनों पूर्व विद्यालय में दर्जनों विद्यार्थियों के बाल अभिभावकों की अनुमति के बिना काटे जाने का मामला सामने आया था। घटना के बाद कई विद्यार्थियों का सिर मुंडवाना पड़ा था। मामले की शिकायत के बाद अभिभावक और जनप्रतिनिधि विद्यालय पहुंचे थे। शिकायत जिला स्तर तक पहुंचने के बाद जांच दल गठित कर मामले की जांच कराई गई थी।
प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रभारी प्रधानाध्यापक ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर संबंधित विद्यालयों के प्रभारी प्रधानाध्यापकों से पत्राचार किया। इसे उन्होंने मनमाने रवैये का उदाहरण बताया। इसके बाद विभाग की ओर से मलय कुमार सिंह को उनके मूल पदस्थापित विद्यालय लवाही कला में विरमित करने का आदेश जारी किया गया। आदेश के अनुसार 11 अगस्त को उन्हें रामप्रसाद पाठक को प्रभार सौंपना था और 12 अगस्त को मूल विद्यालय में योगदान देना था।
प्रखंड प्रमुख का आरोप है कि आदेश के अनुपालन से पहले 10 अगस्त की शाम छात्र-छात्राओं को गढ़वा ले जाया गया। उनके अनुसार बच्चों को पदाधिकारियों से मिलाकर प्रभारी प्रधानाध्यापक के विरमण को रोकने की मांग की गई। गढ़वा से लौटने में रात करीब 10 बज गए। इस दौरान मूसलाधार बारिश के कारण बच्चे भीग गए। कांडी पहुंचने के बाद उन्होंने बारिश से बचने के लिए विद्यालय परिसर में जगह तलाशने का प्रयास किया।
सूचना मिलने पर बीडीओ राकेश सहाय मौके पर पहुंचे। बच्चों की स्थिति को देखते हुए प्रखंड प्रमुख और बीडीओ ने अपनी गाड़ियों से उन्हें उनके घर भेजने की व्यवस्था की।
प्रखंड प्रमुख ने कहा कि बच्चों ने अपने अभिभावकों को जिला में कार्यक्रम होने की बात बताई थी, जबकि उनके अनुसार ऐसा कोई कार्यक्रम निर्धारित नहीं था। उन्होंने कहा कि विभागीय आदेश के बाद विरमित शिक्षक को अपने मूल विद्यालय में योगदान देना चाहिए था। आरोप लगाया कि विरमण रोकने के लिए बच्चों को आगे किया गया।
प्रमुख ने सवाल उठाया कि देर रात बारिश के बीच छात्र-छात्राओं के साथ यदि कोई अप्रिय घटना हो जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने, छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा विभागीय आदेश का अनुपालन कराने की मांग की है।