भूख और बेबसी ने मां-बाप को किया मजबूर, बेटे को बेचना पड़ा 50 हजार में

Location: पलामू


लेस्लीगंज (पलामू):
पलामू जिले के लेस्लीगंज प्रखंड अंतर्गत लोटवा कामलकेडिया गांव से एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां गरीबी, भूख, बीमारी और बेरोजगारी से जूझ रहे एक दलित दंपति ने अपने नवजात पुत्र को मात्र 50 हजार रुपये में बेच दिया। यह घटना न केवल शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण भारत के उस कड़वे यथार्थ को भी सामने लाती है, जिसे अक्सर आंकड़ों की चादर में ढंक दिया जाता है।

गरीबी की गर्त में डूबा परिवार

रामचंद्र राम और पिंकी देवी नामक यह दंपति न तो किसी सरकारी योजना से जुड़े हैं, न उनके पास आधार कार्ड है, न राशन कार्ड और न ही आवास। पति-पत्नी दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह परिवार चलाते हैं, लेकिन बारिश के दिनों में काम न मिलने से स्थिति और बदतर हो गई। दंपति के चार छोटे बच्चे पहले से हैं। रक्षाबंधन के दिन शेड में पांचवें बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन जन्म के बाद मां बीमार पड़ गई और इलाज तक के पैसे नहीं थे।

पेट की आग बुझाने और बीमारी के इलाज के लिए उन्होंने अपने नवजात पुत्र को लातेहार जिले के एक दंपति को 50 हजार रुपये में बेच दिया। यह सौदा एक स्थानीय मध्यस्थ के जरिए हुआ, जो खरीदार दंपति की बहन है।

व्यवस्था की असफलता

यह परिवार न केवल पूर्णतः भूमिहीन है, बल्कि सरकारी मदद से भी वंचित है। पिंकी के पिता ने उन्हें आधा कट्ठा जमीन जरूर दी, लेकिन पैसे के अभाव में वे उसमें घर नहीं बना सके। बारिश ने उनकी झोपड़ी उजाड़ दी और अब वे एक जर्जर सरकारी शेड में रह रहे हैं।

इनके जीवन की परिस्थितियाँ बताती हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें अब तक नहीं मिला — चाहे वह राशन कार्ड हो, आवास योजना हो या आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य सेवाएँ।

यह घटना प्रशासनिक तंत्र की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है, जहां एक नागरिक को अपने बच्चे को बेचने की नौबत आ जाती है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

मामला सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ। अंचल अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि दंपति को फौरी तौर पर अनाज और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बीडीओ सुकेशनी केरकेट्टा ने संबंधित डीलर को अनाज देने का निर्देश दिया है।

वहीं, बाल कल्याण समिति (CWC) की टीम ने हस्तक्षेप करते हुए कहा है कि बच्चे को वापस लाने और परिवार को मदद पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

मानवता बनाम व्यवस्था

यह घटना बताती है कि भूख, बेरोजगारी और कुपोषण जैसी समस्याएँ आज भी सैकड़ों-हजारों ग्रामीण परिवारों को झकझोर रही हैं। “बेटा बेच दिया” — यह केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर एक करारा तमाचा है जो जनकल्याण की योजनाओं के दावे तो करती है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन में विफल रहती है।

यह एक दंपति की व्यक्तिगत मजबूरी नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक तंत्र की सामूहिक विफलता है। जब किसी मां-बाप को अपने कलेजे के टुकड़े को बेचना पड़े, तब यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था के लिए चेतावनी है।


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  • Vivekanand Upadhyay

    Location: Garhwa Vivekanand Updhyay is the Chief editor in AapKiKhabar news channel operating from Garhwa.

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