गढ़वा की चौपट शिक्षा व्यवस्था का खुला सच: स्कूलों में शिक्षक गायब, बच्चों का भविष्य भगवान भरोसे

Location: Garhwa


गढ़वा जिले की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की असली तस्वीर अब धीरे-धीरे खुलकर सामने आने लगी है। वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें होती रही हैं, लेकिन पहली बार ऐसा लग रहा है कि प्रशासन ने जमीनी सच्चाई को गंभीरता से देखना शुरू किया है।
उपायुक्त अनन्य मित्तल के निर्देश पर 13 मई 2026 को जिले के 67 सरकारी विद्यालयों में चलाया गया औचक निरीक्षण अभियान कई चौंकाने वाले सवाल छोड़ गया है।
निरीक्षण में कहीं शिक्षक अनुपस्थित मिले, कहीं पढ़ाई का माहौल नहीं दिखा, तो कहीं पूरा विद्यालय बंद पाया गया। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था लंबे समय से भगवान भरोसे चल रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी स्कूलों के कई शिक्षक पढ़ाने में रुचि क्यों नहीं ले रहे?
सरकार हर महीने मोटा वेतन दे रही है, सुविधाएं दे रही है, लेकिन बदले में बच्चों को क्या मिल रहा है?
कई विद्यालयों में शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते, बच्चों की पढ़ाई नियमित नहीं होती और स्कूल केवल औपचारिक उपस्थिति का केंद्र बनकर रह गए हैं।
गढ़वा में शिक्षा व्यवस्था की हालत इतनी कमजोर हो चुकी है कि निरीक्षण के दौरान ही कई शिक्षक स्कूल से गायब मिले। मेराल प्रखंड का उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय कोलोदोहर तो बंद ही पाया गया। यह स्थिति बताती है कि निगरानी व्यवस्था कितनी कमजोर रही है और शिक्षकों में जवाबदेही का कितना अभाव है।
डीइओ कैसर रज़ा द्वारा रंका के विद्यालयों के निरीक्षण में शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। वहीं अनुराग मिंज ने मेराल क्षेत्र के विद्यालयों की जांच की। अनुपस्थित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और विभागीय कार्रवाई शुरू करने की बात कही गई है।
लेकिन असली चिंता केवल अनुपस्थित शिक्षक नहीं हैं।
समस्या उससे कहीं बड़ी है।
गढ़वा के कई सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। बच्चे कक्षा में पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही। कई जगहों पर शिक्षक सिर्फ नौकरी निभाते नजर आते हैं, शिक्षण की जिम्मेदारी नहीं।
ग्रामीण इलाकों के गरीब परिवार अपने बच्चों का भविष्य सरकारी स्कूलों पर छोड़ते हैं क्योंकि उनके पास निजी स्कूलों का विकल्प नहीं होता। ऐसे में यदि शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी से दूर भागेंगे तो सबसे बड़ा नुकसान उन बच्चों का होगा जिनकी पूरी जिंदगी शिक्षा पर निर्भर है।
जिले के KGBV और JBAV विद्यालयों का निरीक्षण भी किया गया, जहां छात्राओं के लिए भोजन, सुरक्षा, स्वच्छता और आवासीय सुविधाओं की जांच हुई। कई जगह व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, लेकिन कुछ विद्यालयों में साफ-सफाई और अनुश्रवण की कमी भी सामने आई।
गढ़वा में लंबे समय बाद पहली बार ऐसा माहौल दिख रहा है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन सरकारी स्कूलों को लेकर गंभीर दिखना चाहता है।
लेकिन सवाल यह भी है कि क्या यह सख्ती लगातार जारी रहेगी या कुछ दिनों बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
क्योंकि गढ़वा की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी बीमारी यही रही है—
निरीक्षण होता है, रिपोर्ट बनती है, नोटिस जारी होते हैं, लेकिन जमीन पर बहुत कम बदलाव दिखाई देता है।
अगर प्रशासन वास्तव में सरकारी स्कूलों की स्थिति बदलना चाहता है तो केवल औचक निरीक्षण से काम नहीं चलेगा। नियमित मॉनिटरिंग, कठोर कार्रवाई और पढ़ाई के वास्तविक मूल्यांकन की जरूरत होगी।
वरना सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति तो दर्ज होती रहेगी, लेकिन उनका भविष्य लगातार अंधेरे में जाता रहेगा।

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  • Vivekanand Upadhyay

    Location: Garhwa Vivekanand Updhyay is the Chief editor in AapKiKhabar news channel operating from Garhwa.

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