Location: Ranka
गढ़वा के रंका प्रखंड में मंडल डैम विस्थापन का मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर तेज होता दिख रहा है। विश्रामपुर और बलीगढ़ गांव के ग्रामीणों की बैठक में स्थानीय विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने हेमंत सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी और “नीलांबर-पीतांबर की विरासत मिटाने” का गंभीर आरोप लगाया।
बैठक बाइस प्लॉट में आयोजित हुई, जहां कुटकु डूब क्षेत्र और स्थानीय गांवों के आदिवासी परिवार बड़ी संख्या में जुटे। ग्रामीणों ने विधायक के सामने आशंका जताई कि कुटकु डूब क्षेत्र के लोगों को विश्रामपुर और बलीगढ़ में बसाने से स्थानीय लोगों की जमीन, जंगल और रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीणों का कहना था कि उनकी आजीविका पूरी तरह जंगल और स्थानीय संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में नए विस्थापन से संघर्ष और संसाधनों का दबाव बढ़ेगा। वहीं कुटकु डूब क्षेत्र से आए लोगों ने भी सरकार की पुनर्वास नीति पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि जिन परिवारों के पास 15 से 20 एकड़ तक जमीन है, उन्हें बदले में केवल 1 एकड़ भूमि दी जा रही है।
बैठक में सबसे तीखा हमला विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने बोला। उन्होंने कहा कि
“अंग्रेजों ने भी नीलांबर-पीतांबर की धरती को डुबाने की कोशिश की थी, आज वही काम राज्य सरकार कर रही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना ग्राम सभा की अनुमति आदिवासी परिवारों को जबरन विस्थापित किया जा रहा है, जो संविधान और पेसा कानून की भावना के खिलाफ है। विधायक ने कहा कि सरकार खुद को आदिवासी हितैषी बताती है, लेकिन जमीन और जंगल से जुड़े लोगों के अधिकार छीन रही है।
तिवारी ने चेतावनी दी कि यदि विस्थापन प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो गढ़वा से रांची तक बड़ा आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों में विस्थापन का मतलब है आदिवासी परिवारों को भूख और बेरोजगारी की ओर धकेलना।
बैठक में विधायक प्रतिनिधि रिंकू तिवारी समेत कई सामाजिक और ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद रहे। कुटकु, बलीगढ़ और विश्रामपुर के बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
मंडल डैम और विस्थापन का यह मुद्दा अब सिर्फ पुनर्वास तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे आदिवासी अस्तित्व, जल-जंगल-जमीन और ऐतिहासिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है।