मित्रों,
रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग और राज्य कर्मचारी चयन आयोग में नियुक्ति घोटाला सामने आने के बाद इन संस्थाओं को लेकर मेरी धारणा बदल गई. गड़बड़ी होती है, पैसे का लेनदेन होता है, इसके बारे में सुनता था. लोग बताते थे. पर यकीन नहीं होता था. सोचता था थोड़ी बहुत गड़बड़ी होती होगी, दो-चार लोग पैसे और हाई लेवल पैरवी के बल पर नौकरी हासिल कर लेते होंगे. लेकिन अधिकांश छात्र-छात्राएं बिना पैसे दिए नौकरी में आते हैं.
नियुक्ति वितरण समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य जब बड़े-बड़े दावे करते थे तो थोड़ा विश्वास होता था कि नहीं इतनी गड़बड़ी नहीं होती है. लोग सरकार और संस्थाओं को ऐसे ही बदनाम करते हैं. यह मेरी बड़ी भूल थी. इसके लिए मैं आप सबसे क्षमा चाहता हूं.
मैं गांव देहात का रहने वाला हूं. लोगों से आत्मीय संबंध है. पढ़ाई -लिखाई, रोजी-रोजगार के लिए रांची आया था. अब अधिक समय यहीं बितता है. फिर भी गांव समाज से जीवंत संपर्क और अक्सर आना-जाना लगा रहता है. लंबे समय से पत्रकारिता में हूं.
जब गांव जाता हूं. कुछ बेरोजगार युवा मुझसे मिलने आते हैं. बताते हैं वह क्या कर रहे हैं. कौन सी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. क्या-क्या सफलता हासिल की है.. अंत में बताते हैं बिना पैसा दिए तो होगा नहीं. आप रांची में रहते हैं. कोई सूत्र बता दीजिए, पैरवी कर दीजिए जगह जमीन, गहना- जेवर बेचकर पैसे का प्रबंध करेंगे. सरकारी नौकरी तो मिल जाएगी. पड़ोस के गांव के एक व्यावसायिक पुत्र ने 30 लाख में नौकरी हासिल कर ली. पढ़ने में बिल्कुल कमजोर था, लेकिन 30 लख रुपए में मार्केटिंग ऑफिसर बन गया. ऐसे कई उदाहरण बताते हैं. पैसे के बल पर किसकी-किसकी नौकरी लगी.
मैं उनसे हाथ जोड़ लेता. कहता था, मेरी कोई पहुंच- पैरवी नहीं है. मैं भी तुम लोगों की तरह सामान्य आदमी हूं. यह सब अफवाह और गलत बात है. पैसे से नौकरी नहीं मिलती. मेहनत करो, सफलता मिलेगी, पैसे के चक्कर में मत रहो.
जब सब कुछ कंप्यूटराइज है तो फिर पैसे से कहां नौकरी मिलेगी. मैं उन्हें खूब समझता था. मेहनत करने को कहता था, फिर भी वह मेरी बातों पर भरोसा नहीं करते. कहते थे, ध्यान दीजिएगा. मैं भी कहता था, अच्छा रांची जाऊंगा तो पता करूंगा, कौन लोग हैं इस खेल में. मुझे यकीन नहीं होता तो मैं पता क्यों करता. मेरा कोई सूत्र भी नहीं था.
लेकिन अब जब मामला सामने आया तो समझा गांव के युवा जो कह रहे थे वह सच था. मैं ही गलत था. युवाओं का भरोसा तोड़ने वाले तुम्हें कभी माफी नहीं मिलेगी. सरकारी यदि रोजगार और युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. पारदर्शिता और युवाओं के भरोसे के लिए सभी परीक्षाओं को रद्द कर नई नियुक्ति करनी चाहिए. जिन लोगों ने पैसे के बल पर नौकरी हासिल की है, उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो. पैसे के बल पर बड़ी संख्या में अपात्र लोगों ने सरकारी नौकरी हासिल कर ली है. अब सरकार के फैसले की प्रतीक्षा है. रांची में भी युवाओं का सत्याग्रह आंदोलन शुरू हो चुका है. जाग जाइए सरकार. वरना दिल्ली की कहानी दोहराई जाएगी.
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