Location: Meral
मेराल। प्रखंड के बिकताम पंचायत अंतर्गत बसरिया गांव में आंगनबाड़ी केंद्र से गांधी नगर तक जाने वाली कच्ची सड़क बारिश के बाद बदहाल हो गई है। सड़क पर जगह-जगह कीचड़ और गड्ढे बन जाने से लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। स्थिति ऐसी है कि दोपहिया और चारपहिया वाहनों की बात तो दूर, पैदल चलना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन गया है।
इस सड़क से बसरिया सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों के साथ बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे प्रतिदिन आवागमन करते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों की तस्वीर यहां की बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां करती है। कंधों पर किताब-कॉपी और भविष्य की जिम्मेदारियां, जबकि हाथों में जूते-चप्पल लेकर बच्चे कीचड़ भरे रास्ते को पार करने को मजबूर हैं। कपड़े और जूते खराब न हों, इसके लिए कई बच्चे रास्ते में ही जूते-चप्पल उतारकर हाथ में ले लेते हैं और कीचड़ से होकर स्कूल पहुंचते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क किसानों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए भी मुख्य आवागमन का माध्यम है। किसानों को खेतों तक पहुंचने और मरीजों को अस्पताल ले जाने के लिए इसी रास्ते पर निर्भर रहना पड़ता है। बारिश के दिनों में सड़क के गड्ढों में पानी और कीचड़ भर जाने से परेशानी और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की समस्या को लेकर गढ़वा के उप विकास आयुक्त को लिखित आवेदन देकर समाधान की मांग की गई थी। ग्रामीणों के अनुसार आवेदन पर संज्ञान लेते हुए डीडीसी ने मामले की जांच कर जल्द समाधान की दिशा में कार्रवाई का आश्वासन दिया था। मुखिया सुरेश राम और पंचायत सचिव रेखा कुमारी को मामले की जांच कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है और समस्या के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है, लेकिन गांव के लोगों को आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उनका सवाल है कि जब इसी रास्ते से स्कूली बच्चे, किसान, बुजुर्ग और मरीज रोजाना गुजरते हैं, तो आखिर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस समस्या की ओर क्यों नहीं जा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के समय विधायक, सांसद और पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधि गांव की समस्याओं को लेकर सक्रिय दिखाई देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही आम लोगों की समस्याएं प्राथमिकता से बाहर हो जाती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से बरसात के दौरान तत्काल सड़क को चलने लायक बनाने और स्थायी रूप से सड़क निर्माण कराने की मांग की है।












