Location: Garhwa
भगवान परशुराम की जयंती मनायी गयी
गढ़वा : गढ़वा शहर के चिनिया मोड़ पर रविवार को अक्षय तृतीया के अवसर पर भगवान परशुराम की जयंती मनायी गयी. कार्यक्रम की शुरूआत भगवान परशुरामजी की पूजा एवं हवन से किया गया. शहर के अशोक विहार निवासी परशुराम उपाध्याय उर्फ दुदुन उपाध्याय ने भगवान परशुराम का विधिवत पूजन किया. इस अवसर पर बजेंद्र पाठक एवं अरविंद मिश्र के मंत्रोच्चार एवं जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया. तत्पश्चात उपस्थित सभी लोगों ने भगवान परशुरामजी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया. इस अवसर पर मुख्य पथ से गुजरनेवाले राहगिरों के बीच प्रसाद वितरण किया गया एवं शर्बत पिलाया गया. कार्यक्रम में अपना उद्गार व्यक्त करते हुये समाजसेवी परशुराम उपाध्याय ने कहा कि भगवान परशुराम का अवतार अन्याय और अनीति के विरूद्ध संघर्ष के लिये हुआ था. उन्होंने बार-बार अधर्म के खिलाफ फरसा उठाया और आतातायियों का संहार किया. आज एक बार पुन: धरती पर अत्याचार और व्याभिचार बढ़ गया है. इसलिये हम सबों को भगवान परशुराम से प्रेरणा लेकर अधर्म के विरूद्ध एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है. इस मौके पर गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने कहा कि वर्तमान युग में भगवान परशुराम की छवि को गलत रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है. त्रेता युग में रामावतार के पूर्व भगवान परशुराम ने आतातायियों से लोहा लिया था. उन्होंने तब के आतातायी राजाओं को दंडित कर उन्हें राज गद्दी से पदच्यूत किया था और समतामूलक समाज की स्थापना की थी. लेकिन आधुनिक समाज के तथाकथित बुद्धिजीवि इसे एक खास जाति से जोड़कर समाज को दिग्भ्रमित करने लगे कि भगवान परशुराम ने क्षत्रियों का चुन-चुनकर संहार किया था. यह एक सोची-समझी बहुत बड़ी साजिश है. कोई भी अवतारी चेतना इतनी संकीर्ण कैसे हो सकती है. अवतार तो अधर्म को समाप्त करने के लिये होता है. वह जाति-संप्रदाय की सीमा से परे होता है. उसके लिये वही प्रिय होता है, जो धर्म का आचरण करता है. उन्होंने इसका उदाहरण देते हुये कहा कि आखिर परशुरामजी ने भगवान राम को पहचानते ही उन्हें अपना अस्त्र देकर स्वयं तपस्या के लिये महेंद्र पर्वत पर क्यों चले गये थे. आखिर भगवान राम का भी जन्म क्षत्रिय कुल में ही हुआ था. तो फिर परशुरामजी ने भगवान राम से जाति के नाम पर विरोध क्यों नहीं किया. श्री पाठक ने कहा कि हमें अपने भगवान और महापुरूषों को सही रूप से जानने के लिये अपने मूल ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिये. अन्यथा आज भगवान और महापुरूष भी राजनीति के शिकार होकर रह गये हैं. लोगों ने भगवान और संत-महापुरूषों को बांट दिया है. आज के समाज के लिये इससे अधिक दुखद स्थिति और कुछ नहीं हो सकती है. इस मौके पर गढ़वा विधायक प्रतिनिधि विवेकानंद तिवारी, आनंद मोहन तिवारी, शैलेंद्र पाठक, दीपक पाठक, नवीन पाठक, अवधेश चौबे, छोटू पांडेय, अखिलेश दूबे उर्फ मुन्ना दूबे, सोनू तिवारी, गुड्डु पांडेय, जितेंद्र सिंह, सच्चिदानंद सिंह, राजेश दूबे, सूर्यकांत उपाध्याय, कृष्ण मोहन तिवारी, अरविंद दूबे, प्रवीण तिवारी, मनोज दूबे, पीयूष दूबे, कमलेश तिवारी, संतोष तिवारी, अमरेश तिवारी, पंकज दूबे, आलोक त्रिपाठी सहित काफी संख्या में लोग उपस्थित थे.











