Location: पलामू
पलामू। झारखंड के चर्चित गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसके आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं। पलामू जिले के रेडमा मोहल्ले का रहने वाला सुजीत सिन्हा कभी झारखंड के सबसे प्रभावशाली अपराध सरगनाओं में गिना जाता था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, शस्त्र अधिनियम और संगठित अपराध से जुड़े 75 से अधिक मामले विभिन्न थानों में दर्ज बताए जाते हैं।
सुशील श्रीवास्तव गिरोह से शुरू हुआ अपराध का सफर
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत सिन्हा ने अपने अपराध की शुरुआत कुख्यात गैंगस्टर सुशील श्रीवास्तव के गिरोह से की थी। बाद में उसने अपना अलग गिरोह बनाया और पलामू, गढ़वा, लातेहार, रांची, धनबाद, चतरा समेत कई जिलों में रंगदारी और लेवी वसूली का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया।
उस पर कोयला कारोबार, सड़क निर्माण, ठेकेदारी, क्रशर उद्योग, ट्रांसपोर्ट और अन्य व्यवसायों से करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूलने के आरोप लगते रहे। जांच एजेंसियों का दावा रहा है कि जेल में बंद रहने के बावजूद वह मोबाइल और अपने गुर्गों के माध्यम से पूरे गिरोह का संचालन करता था।
पाकिस्तान कनेक्शन ने बढ़ाई जांच एजेंसियों की चिंता
सुजीत सिन्हा के नेटवर्क का सबसे सनसनीखेज पहलू उसका कथित अंतरराष्ट्रीय अपराधियों से जुड़ाव माना गया। पुलिस जांच में दावा किया गया था कि वह पाकिस्तान में छिपे अपराधी प्रिंस खान के साथ मिलकर झारखंड में रंगदारी, गोलीबारी और संगठित अपराध की घटनाओं को अंजाम देता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों गिरोह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से अवैध हथियार मंगाने की साजिश में शामिल थे और रंगदारी से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल पूरे नेटवर्क को संचालित करने में किया जाता था।
पत्नी समेत पांच की गिरफ्तारी के बाद हुआ था बड़ा खुलासा
रांची पुलिस ने सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा समेत पांच लोगों को गिरफ्तार करने के बाद इस नेटवर्क का खुलासा किया था। गिरफ्तार अन्य आरोपियों में कांके निवासी इमानुल हक उर्फ बबलू खान, मो. शाहिद उर्फ अफरीदी खान, मो. सेराज उर्फ मदन तथा पंडरा निवासी रवि आनंद उर्फ सिंघा शामिल थे। पुलिस ने दावा किया था कि ये लोग गिरोह के संचालन और संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
एनआईए और सीआईडी भी कर रही थीं जांच
दिसंबर 2020 में लातेहार जिले के बालूमाथ में कोयला परिवहन से जुड़े वाहनों में आगजनी, पुलिस पर फायरिंग और विस्फोटक के इस्तेमाल के मामले में सुजीत सिन्हा को प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल किया गया था। इस मामले की जांच बाद में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तक पहुंची।
इसके अलावा दिसंबर 2025 में झारखंड सीआईडी ने सुजीत सिन्हा और उसके गिरोह से जुड़े चार महत्वपूर्ण मामलों की जांच अपने हाथ में ले ली थी।
2016 में चरम पर पहुंचा अपराध का साम्राज्य
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2016 में सुजीत सिन्हा का अपराध अपने चरम पर था। इसी दौरान रंगदारी नहीं देने पर एक कारोबारी की हत्या के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ व्यापक अभियान चलाया। कार्रवाई तेज होने पर वह ओडिशा भाग गया था, लेकिन चिल्का झील के पास पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से वह विभिन्न जेलों में बंद रहा, हालांकि जांच एजेंसियों का आरोप था कि जेल के भीतर से ही वह अपने गिरोह का संचालन करता रहा।
16वीं जेल शिफ्टिंग बनी आखिरी सफर
रविवार रात साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल स्थानांतरित किए जाने के दौरान यह उसकी 16वीं जेल शिफ्टिंग थी। पुलिस के अनुसार, रास्ते में भागने की कोशिश के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें उसकी मौत हो गई।
अमन साहू के बाद दूसरा बड़ा हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर
झारखंड में पिछले डेढ़ वर्ष के दौरान यह दूसरा बड़ा हाई-प्रोफाइल पुलिस एनकाउंटर माना जा रहा है। इससे पहले 11 मार्च 2025 को पलामू में गैंगस्टर अमन साहू की पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी। उस समय उसे रायपुर से रांची लाया जा रहा था।
सुजीत सिन्हा की मौत के साथ झारखंड के एक बड़े अपराध नेटवर्क का अंत माना जा रहा है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब भी उसके गिरोह के बचे हुए सदस्यों और आर्थिक नेटवर्क पर कार्रवाई बड़ी चुनौती बनी हुई है।
यह स्टोरी फॉलो-अप (Backgrounder) शैली में तैयार की गई है, जो आपके “आपकी खबर (AVN)” पोर्टल या यूट्यूब न्यूज़ बुलेटिन के लिए उपयुक्त रहेगी।












