रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस में राज्यसभा चुनाव को लेकर समझौता हो गया है. कांग्रेस ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मना लिया है और उनकी नाराजगी दूर कर ली है. हेमंत सोरेन ने तमाम राजनीतिक परिस्थितियों और संभावनाओं का आकलन करने के बाद राज्यसभा चुनाव में एक सीट पर ही उम्मीदवार देने का फैसला लिया. पार्टी ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है. पार्टी अब एक ही सीट पर चुनाव लड़ेगी. दूसरी सीट पर कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी प्रणव झा चुनाव लड़ेंगे.
झामुमो की ओर से एक सीट पर प्रत्याशी दिए जाने की घोषणा के बाद इंडिया गठबंधन पर मंडरा रहा टूट का खतरा भी फिलहाल टल गया है. हेमंत सोरेन ने बैजनाथ राम को प्रत्याशी बनाकर सबको चौंका दिया है. क्योंकि बैजनाथ राम की चर्चा कहीं नहीं थी. जिन नेताओं की चर्चा थी वह टिकट की दौड़ में पीछे रह गए. कई लोग कल्पना सोरेन को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर लगातार दलीलें दे रहे थे. लेकिन मैंने पहले ही लिखा था कि कल्पना सोरेन की तनिक भी संभावना नहीं है. अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि वह झारखंड छोड़कर दिल्ली की राजनीति करें.
लातेहार के पूर्व विधायक रहे बैजनाथ राम को प्रत्याशी बनाकर मुख्यमंत्री ने एक साथ कई संदेश दिया है. स्वर्गीय शिबू सोरेन की सीट पर परिवार में बहन सहित अन्य दावेदार थे. बहन अंजनी सोरेन की खूब चर्चा हुई. हेमंत सोरेन पर दबाव भी बनाया गया. बताया जा रहा था कि मुख्यमंत्री बहन को उम्मीदवार बना सकते हैं. क्योंकि उन पर इसके लिए काफी दबाव है. लेकिन मुख्यमंत्री ने परिवारवाद की राजनीति से बचने के लिए बहन को टिकट नहीं दिया. गुरु जी के के निकट सहयोगी रहे विनोद पांडे की उम्मीदवारी भी सीएम ने खारिज कर दी.
बैजनाथ राम को टिकट देकर मुख्यमंत्री ने राज्य में दलित कार्ड खेलने का भी प्रयास किया है. एक दलित को राज्यसभा का टिकट देकर उनका विश्वास जीतने का प्रयास किया है. बैजनाथ राम सब पर भारी पड़ गए. उनका नाम सुनते हैं सब चौंक गए.
राज्यसभा चुनाव को लेकर झामुमो और कांग्रेस में जो तल्खी थी उस पर भी अब लगभग विराम लग गया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जानते थे कि दूसरी सीट के लिए उनके पास भी आंकड़ा नहीं है. ऐसे में सिर्फ उम्मीदवार देने से नहीं होगा. उसके लिए वोट कहां से आएगा. यदि उम्मीदवार देंगे और वह नहीं जीत पाया तो फिर किरकिरी होगी. इससे बेहतर है कांग्रेस को ही अवसर दिया जाए. कांग्रेस के आला नेताओं से बातचीत के बाद मुख्यमंत्री ने अपने फैसले पर विचार किया और एक ही उम्मीदवार देने का निर्णय लिया. मुख्यमंत्री के फैसले से सरकार पर गहरता संकट भी टल गया है. अब झारखंड में कोई नया समीकरण बनने की संभावना नहीं दिख रही है.










