Location: Garhwa
गढ़वा : मेराल प्रखंड से अलग कर ओखरगाड़ा को प्रखंड बनाए जाने की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बुधवार को ओखरगाड़ा प्रखंड नव निर्माण संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने गढ़वा समाहरणालय के पास धरना प्रदर्शन किया और उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को विस्तृत मांग पत्र सौंपा।
संघर्ष समिति ने पत्र में बताया कि खोरीडीह, चेचरिया, ओखरगाड़ा पूर्वी, ओखरगाड़ा पश्चिमी, विकटाम और अरंगी – इन छह पंचायतों को मिलाकर नया प्रखंड बनाए जाने की मांग की जा रही है। ये पंचायतें मेराल मुख्यालय से 20 से 35 किलोमीटर दूर हैं, जिससे ग्रामीणों को प्रशासनिक कार्यों में भारी कठिनाई होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़कें, लंबी दूरी और परिवहन की कमी के कारण गरीब, बुजुर्ग और महिलाएं प्रखंड मुख्यालय तक नहीं पहुंच पाते, जिससे वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। एक सामान्य प्रमाणपत्र बनवाने या आवास योजना में नामांकन के लिए भी लोगों को 2-3 दिन भटकना पड़ता है, जिससे समय, धन और मेहनत तीनों की बर्बादी होती है।
संघर्ष समिति ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार इन पंचायतों की जनसंख्या 35,000 थी, जो अब बढ़कर लगभग 50,000 हो गई है। इतनी बड़ी आबादी के लिए स्थानीय प्रशासनिक इकाई का होना आवश्यक है। क्षेत्र में प्रखंड कार्यालय की स्थापना के लिए जमीन भी उपलब्ध है, जिससे भवन निर्माण और अन्य संस्थानों की स्थापना में कोई रुकावट नहीं आएगी।
संघर्ष समिति ने चेताया कि यदि सरकार शीघ्र निर्णय नहीं लेती, तो जनता में आक्रोश बढ़ेगा। समिति ने राज्य सरकार से अपील की है कि ग्राम्य विकास और सुशासन के उद्देश्य को पूरा करने के लिए ओखरगाड़ा को जल्द से जल्द प्रखंड बनाया जाए।
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए अलग पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वे जनता की भावनाओं का सम्मान करें और शीघ्र निर्णय लें।
प्रखंड बनने से होंगे ये लाभ:शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों में वृद्धि,योजनाओं की पहुंच आम जनता तक,प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता,ग्रामीण विकास में तेजी होगी
जनता की आवाज अब निर्णायक मोड़ पर है। वर्षों से लंबित इस मांग को लेकर क्षेत्र में एकजुटता दिखाई दे रही है और अब सबकी नजरें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हैं।















