Location: Meral
मेराल (गढ़वा): प्रखंड के चामा पंचायत अंतर्गत कुशमही गांव के ग्रामीणों ने वन अधिकार अधिनियम, 2006 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार पट्टा भूमि पर वन विभाग द्वारा बिना ग्रामसभा की सहमति के बांस रोपण, ट्रेंच एवं पिट खुदाई कराए जाने का आरोप लगाया है। इस संबंध में ग्रामीणों ने अंचल पदाधिकारी (सीओ) यशवंत नायक को आवेदन सौंपकर तत्काल कार्य पर रोक लगाने तथा मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों के आवेदन में कहा गया है कि ग्रामसभा कुशमही के कोरवा एवं परहिया आदिम जनजाति के लाभुकों को वर्ष 2011 में व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा तथा वर्ष 2025 में सामुदायिक वन अधिकार पट्टा विधिवत प्रदान किया गया था। लाभुक वर्षों से उक्त भूमि पर खेती-बाड़ी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं।
आरोप है कि गढ़वा उत्तरी रेंज के रेंजर, फॉरेस्टर, फॉरेस्ट गार्ड एवं अन्य वनकर्मियों द्वारा ग्रामसभा की बैठक, प्रस्ताव और पूर्व सहमति के बिना पट्टा-धारित भूमि पर मशीनों से ट्रेंच एवं पिट की खुदाई कराकर बांस रोपण कराया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे उनकी खेती और आजीविका प्रभावित हो रही है तथा यह वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के विपरीत है।
आवेदन में संविधान के अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 244(1), पाँचवीं अनुसूची तथा अनुच्छेद 300A का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों एवं उनकी संपत्ति की विधिसम्मत सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 3, 4(5), 5 एवं 6 का हवाला देते हुए ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की कार्रवाई को अवैध बताया गया है।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि अधिकारों की रक्षा के लिए संबंधित भूमि की डोरी (घेराबंदी) की गई है, इसके बावजूद कार्य जारी रखा जा रहा है। इसे ग्रामसभा की अनदेखी एवं वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन बताया गया है।
आवेदन में रामजी कोरवा, हिरादेव कोरवा, जगदीश कोरवा, राजेन्द्र कोरवा, तुलसी कोरवा, प्रभु कोरवा, रघुनाथ कोरवा तथा अमिरका परहिया सहित अन्य वन अधिकार पट्टाधारकों की भूमि का विवरण भी संलग्न किया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित क्षेत्र में चल रहे बांस रोपण, ट्रेंच एवं पिट खुदाई कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए, भूमि की यथास्थिति बरकरार रखी जाए, ग्रामसभा की पूर्व सहमति के बिना भविष्य में किसी भी प्रकार का कार्य नहीं कराया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वन विभाग का पक्ष:
समाचार लिखे जाने तक इस मामले में वन विभाग का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।











