Location: Garhwa
कार्ल मार्क्स के कथन का उल्लेख करते हुए—कि किसी गलत बात का खंडन न करना बौद्धिक बेईमानी है—झारखण्ड ऑफिसर्स टीचर्स एंड एंप्लॉई फेडरेशन (झारोटेफ) जिला इकाई गढ़वा एवं झारखण्ड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ जिला इकाई गढ़वा ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) गढ़वा द्वारा विभागीय अधिसूचनाओं के विरुद्ध निर्गत आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है।
झारोटेफ गढ़वा के जिलाध्यक्ष सुशील कुमार एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नागेन्द्र चौधरी ने संयुक्त रूप से कहा कि आगामी फरवरी माह में आयोजित वार्षिक माध्यमिक एवं इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 को लेकर छात्रों की शत-प्रतिशत सफलता हेतु प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक कर सख्त निर्देश देना एक सराहनीय कदम है। शिक्षक समुदाय सदैव छात्रहित को सर्वोपरि मानता है और शैक्षणिक दायित्वों के निर्वहन में पूरी निष्ठा से कार्य करता है।
हालांकि, डीईओ द्वारा जिले के सभी माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक शिक्षकों के आकस्मिक अवकाश को स्थगित करने का आदेश स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखण्ड सरकार के संयुक्त सचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अध्याय-3 में वर्णित छुट्टी स्वीकृति प्राधिकार का स्पष्ट अतिक्रमण है। अधिसूचना में आकस्मिक अवकाश पर किसी प्रकार की शर्त नहीं लगाई गई है, इसके बावजूद ऐसा आदेश जारी करना शिक्षा पदाधिकारी की असहिष्णु प्रवृत्ति को दर्शाता है।
शिक्षक संगठनों ने बताया कि जिले के प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक पहले से ही स्प्लिट सिलेबस के अनुसार पाठ्यक्रम पूर्ण करने, कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त प्रयास करने तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक प्रतिवेदन समय पर देने जैसे दायित्वों का समुचित निर्वहन कर रहे हैं। ऐसे में आकस्मिक अवकाश पर पूर्ण प्रतिबंध न्यायसंगत नहीं है।
इसके अतिरिक्त, इस आदेश से शिक्षकों को मिलने वाला क्षतिपूर्ति अवकाश भी प्रभावित हो रहा है, जो कि कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग, झारखण्ड सरकार के पत्रांक 5163 दिनांक 21/06/2016 का उल्लंघन है। उक्त पत्र में क्षतिपूर्ति अवकाश को विशेष आकस्मिक अवकाश की प्रकृति का बताया गया है।
शिक्षक संगठनों ने डीईओ गढ़वा से मांग की है कि आदेश पत्र में अविलंब आंशिक संशोधन करते हुए इसे केवल प्री-बोर्ड परीक्षा तक ही मान्य रखा जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि विभागीय निर्देशों के अनुरूप संशोधन नहीं किया गया, तो जिले के शिक्षकों में असंतोष एवं आक्रोश उत्पन्न हो सकता है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव शैक्षणिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।











