बिहार के सामाजिक समीकरण ने भाजपा को चौंकाने से रोका, सम्राट चौधरी होंगे नए मुख्यमंत्री

Location: पटना

रांची: जैसा कि मैंने लिखा था कि बिहार की राजनीतिक और सामाजिक समीकरण को देखते हुए भाजपा कोई नया प्रयोग नहीं करेगी, किसी तरह का जोखिम उठाना नहीं चाहेगी और यही हुआ। भाजपा ने पिछड़े समाज से आने वाले उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री चुन लिया है। अब वह बिहार के नए सम्राट होंगे। सम्राट चौधरी के नाम की चर्चा पहले दिन से ही थी और आखिरकार सभी कयासों को पीछे छोड़ते हुए सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री बन गए। कल वह शपथ लेंगे। नीतीश कुमार भी इस बात के लिए राजी नहीं हुए कि भाजपा सम्राट को छोड़कर किसी दूसरे को मुख्यमंत्री चुने।
   मैंने दो दिन पहले लिखा था कि बिहार में किसी , पिछड़े समाज से आने वाले नेता को ही मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलेगी। क्योंकि नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में बिहार में जो  राजनीतिक जमीन तैयार की है इसमें उलटफेर करना बड़ा जोखिम भरा निर्णय होगा। इसलिए मुख्यमंत्री के चयन में भाजपा ने कोई जोखिम नहीं लिया। नीतीश के रास्ते पर ही बिहार को ले जाने का फैसला लिया। इसीलिए सम्राट चौधरी इस कुर्सी तक पहुंच गए।  बिहार बीजेपी में सम्राट चौधरी से काबिल कई लोग हैं। लेकिन राजनीतिक और सामाजिक मजबूरी की वजह से भाजपा को सम्राट चौधरी को चुनना पड़ा। नीतीश कुमार भी सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के पक्ष में थे। उनकी सहमति से ही मुख्यमंत्री तय हुआ है। इस तरह भाजपा और सम्राट का सपना पूरा हुआ। सम्राट चौधरी दूसरे दल से भाजपा में आए और मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए।
  पिछले कुछ वर्षों से मोदी और अमित शाह की भाजपा अपने निर्णय से सबको चौकाती रही है।  सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री होंगे यह चर्चा तो थी लेकिन दावे के साथ यह कहने को कोई तैयार नहीं था। लेकिन यह बिहार है। यहां की राजनीतिक और सामाजिक समीकरण अन्य राज्यों से बिल्कुल अलग है। बिहार को राजनीतिक रूप से काफी  जागरूक माना जाता है, इसलिए भाजपा ने यहां कोई नया प्रयोग करने से अपने को रोक लिया। भविष्य की राजनीति के लिए यह अच्छा संकेत है। सूझबूझ भरा निर्णय है।
नीतीश की विदाई से बिहार के लोग ऐसे ही दुखी हैं ऐसे में कोई नया प्रयोग गले की फांस बन जाती।
  पिछले वर्ष संपन्न विधानसभा चुनाव नतीजों ने नीतीश कुमार की राजनीतिक केमिस्ट्री को मजबूत आधार दिया था। इस कारण रिकॉर्ड तोड़ जीत मिली थी।
भाजपा इस केमिस्ट्री को तोड़ने का जोखिम नहीं लेना चाहती थी। यदि किसी अगड़ी जाति के नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाता तो बड़े तबके में गलत संदेश जाता। इसलिए भाजपा ने नीतीश की धारा को ही आगे बढ़ने का फैसला लिया। बिहार की राजनीति में दो दशकों तक मुख्यमंत्री रहकर नीतीश कुमार ने जो पहचान बनाई है। विकास के जो कार्य किए हैं वह अद्भुत है। वह बिहार की राजनीति में इतिहास पुरुष के रूप में याद किए जाएंगे।

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  • Sunil Singh

    Sunil Singh is Reporter at Aapki khabar from Ranchi, Jharkhand.

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