नाथवानी की जीत से झारखंड भाजपा को मिला बूस्टर डोज, रणनीति रही सफल, आदित्य साहू भी हुए मजबूत


रांची: राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी की जीत से भाजपा खेमे में उत्साह है. पार्टी में नई ऊर्जा का संचार हुआ है. क्योंकि झारखंड में लंबे समय के बाद पार्टी को बूस्टर डोज मिला है.
    पिछले दो विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद पार्टी का हौसला पस्त हो चुका था.  संगठन के स्तर पर भी खामियां दिख रही थी और पार्टी में गुटबाजी हावी है.
लंबे समय के बाद राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति सफल रही. भाजपा ने बहुत सोच समझकर निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी को समर्थन दिया. नाथवानी ने जब भाजपा से समर्थन मांगा तो पार्टी तुरंत तैयार हो गई. यह इसलिए कि उसे पता था कि नाथवानी चुनाव जीतने के माहिर खिलाड़ी हैं. निर्दलीय होकर भी कैसे चुनाव जीता जा सकता है यह नाथवानी को पता है. झारखंड में सभी राजनीतिक दलों से उनके अच्छे रिश्ते हैं. वह सब कुछ आसानी से मैनेज कर लेते हैं.
भाजपा और एनडीए के पास अपना संख्या बल नहीं था. इसलिए पार्टी के रणनीतिकारों ने अपने सभी नेताओं यहां तक की राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से झारखंड भेजे गए गौरव वल्लभ की दावेदारी को भी खारिज कर दिया. नाथवानी को समर्थन दिया और परिणाम सामने है.
नाथवानी ने भले अपने बूते वोट मैनेज कर जीत हासिल की. लेकिन इसके पीछे भाजपा की रणनीति भी थी. भाजपा ने हर कदम पर नाथवानी का साथ दिया. दोनों ने मिलकर जीत की रणनीति बनाई. भाजपा और एनडीए के विधायकों में किसी तरह की फूट न पड़े इसको लेकर भाजपा का प्रदेश नेतृत्व सजग रहा. मतदान के दो दिन पहले सभी विधायकों को एक होटल में शिफ्ट कर दिया गया.
   प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व के बीच लगातार संवाद होता रहा. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी रणनीतिकारों में शामिल थे. चुनाव को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन ने विजय शर्मा को झारखंड की जिम्मेदारी थी.
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया के दौरान ही नितिन नबीन झारखंड आए थे. दो दिनों तक झारखंड में रहकर उन्होंने नेताओं और कार्यकर्ताओं को सफलता के टिप्स दिए और टास्क भी देकर गए . उन्होंने कहा है कि झारखंड में अगली सरकार हम बनाएंगे. इस दिशा में अभी से प्रयास शुरू हो चुका है. नाथवानी जैसा एक मजबूत राज्यसभा सांसद भी भाजपा को मिल गया. जिसका लाभ पार्टी को मिलता रहेगा.
   प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू भी लगातार पार्टी को मजबूत करने में जुटे हैं. इसमें उन्हें सफलता भी मिल रही है. काफी मेहनत कर रहे हैं. आदित्य साहू के अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा का चुनाव भाजपा के लिए नाक का सवाल था. आदित्य साहू और पार्टी के लिए अग्नि परीक्षा भी थी. इस परीक्षा में पार्टी ने शानदार सफलता हासिल की. भले नाथवानी उम्मीदवार के तौर पर दूल्हा थे. लेकिन धूमधाम से बरात निकलने का श्रेय भाजपा और एनडीए को ही जाता है. चुनाव में जीत से आदित्य साहू भी मजबूत हुए हैं. कार्यकर्ताओं में जो उत्साह दिख रहा है इसका असर आगे भी देखने को मिल सकता है.
      नाथवानी की जीत से इंडिया गठबंधन में दरार पड़ गई है. क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस प्रत्याशी की हार के बाद गठबंधन में तनाव और घमासान की स्थिति है. कांग्रेस राजद और माले की ओर से एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं. इंडिया गठबंधन का कमजोर होना भी बीजेपी के लिए फायदेमंद है.
  सरकार की सेहत भी अच्छी नहीं है. अंदरखाने नया सत्ता समीकरण बनने की पूरी संभावना है. कांग्रेस सरकार से आउट हो सकती हैं और राज्य में गैर कांग्रेस गैर बीजेपी सरकार बन सकती है. सरकार बनाने को लेकर पर्याप्त संख्या बल है.

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  • Sunil Singh

    Sunil Singh is Reporter at Aapki khabar from Ranchi, Jharkhand.

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