दिव्या की चुप्पी अब चीख बन गई है…

Location: Garhwa



विद्यालय में मिली बेइज्जती, समाज की चुप्पी और व्यवस्था की बेरुखी ने एक होनहार बच्ची की जान ले ली

गढ़वा के बड़गड़ प्रखंड की वो सुबह अब भी लोगों के जहन में ताजा है, जब 12वीं की छात्रा दिव्या कुमारी गुप्ता की मौत की खबर पूरे गांव में फैल गई। एक हंसती-खेलती 19 साल की बच्ची, जो रोज़ की तरह स्कूल गई थी, लौट तो आई—but इस बार वह सिर्फ शरीर में लौटी, उसकी आत्मा वहीं कहीं टूट गई थी—विद्यालय के उस प्रांगण में, जहां शिक्षक उसे ज्ञान नहीं, शर्म और ताना दे रहे थे।

दिव्या की गलती बस इतनी थी कि वह जूता पहन कर स्कूल नहीं गई थी। लेकिन उस दिन एसेंबली में जो हुआ, वह सिर्फ एक छोटी सी चूक की सजा नहीं थी—वह एक सार्वजनिक अपमान था। प्रभारी प्रधानाध्यापिका ने उसे सबके सामने डांटा, पीटा और उसका आत्मसम्मान कुचल दिया। वह चुप रही, रोती रही… दो दिन तक खाना नहीं खाया, किसी से ठीक से बात नहीं की। भीतर कुछ टूट रहा था, जो न डॉक्टर समझ पाए, न परिजन।

फिर शुरू हुआ इलाज का सिलसिला—पहले डाल्टनगंज, फिर रांची रिम्स—but तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मंगलवार को जब दिव्या ने आखिरी सांस ली, उसके आंसू नहीं बहे, लेकिन उस आंसुओं की जगह अब उसके परिजन और गांव वाले रो रहे हैं। उन्होंने दिव्या के शव के साथ सड़क पर बैठकर इंसाफ की मांग की। यह सिर्फ विरोध नहीं था, यह एक बिन बोले चीख थी, जो कह रही थी—“हमारी बच्ची मर गई, अब तो जागो!”

परिजन चाहते हैं कि उस शिक्षिका को सजा मिले जिसने शिक्षिका के पद की गरिमा को कलंकित किया। वे चाहते हैं कि दिव्या के परिवार को मुआवजा मिले, ताकि आगे कोई और मां-बाप अपनी बच्ची को पढ़ने भेजने से डरे नहीं। पर सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ मुआवजा काफी है? क्या दिव्या की मौत के बाद स्कूलों में डर और अपमान की जगह समझ और संवेदना सिखाई जाएगी?

विद्यालयों को अनुशासन के नाम पर अपमान का अड्डा नहीं बनने देना है। शिक्षक को डर नहीं, भरोसा बनना चाहिए। लेकिन अगर शिक्षक ही छात्रों को तोड़ने लगें, तो वे स्कूल नहीं, कब्रगाह बन जाते हैं—जैसे वह विद्यालय दिव्या के लिए बन गया।

आज दिव्या हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी चुप्पी अब सवाल बनकर गूंज रही है—
“क्या स्कूलों में अब भी बच्चे सिर्फ पढ़ने जाएंगे या डरने?”
“क्या शिक्षक अब भी मार और तानों से ‘सीख’ देंगे?”
“क्या हर दिव्या के लिए एक सड़क जाम और शव प्रदर्शन जरूरी होगा?”

जवाब हमें और आपको मिलकर देना होगा। ताकि फिर कोई दिव्या चुप न हो, टूट न जाए, मर न जाए।

आपकी राय महत्वपूर्ण है!

इस समाचार पर आपकी क्या राय है? कृपया हमारे लेख को लाइक या डिसलाइक बटन से रेट करें और अपनी प्रतिक्रिया कमेंट सेक्शन में साझा करें। आपके विचार और सुझाव हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और हमें बेहतर सेवा देने में मदद करेंगे। धन्यवाद!

  • Vivekanand Upadhyay

    Location: Garhwa Vivekanand Updhyay is the Chief editor in AapKiKhabar news channel operating from Garhwa.

    News You may have Missed

    मझिआंव व बरडीहा में सांसद प्रतिनिधि मनोनीत, भगवान दत्त तिवारी, रामजतन पासवान व सतीश यादव को मिली जिम्मेदारी

    मझिआंव व बरडीहा में सांसद प्रतिनिधि मनोनीत, भगवान दत्त तिवारी, रामजतन पासवान व सतीश यादव को मिली जिम्मेदारी

    दुपहिया दुर्घटना में घायल युवक की 12 दिन बाद रांची में मौत, गांव में शोक की लहर

    दुपहिया दुर्घटना में घायल युवक की 12 दिन बाद रांची में मौत, गांव में शोक की लहर

    ओखरगाड़ा पूर्वी पंचायत के जोगनी जाने वाली सड़क जर्जर, ग्रामीणों ने शीघ्र निर्माण की उठाई मांग

    ओखरगाड़ा पूर्वी पंचायत के जोगनी जाने वाली सड़क जर्जर, ग्रामीणों ने शीघ्र निर्माण की उठाई मांग

    बाना हाई स्कूल में 25 छात्र-छात्राएं नौवीं की फाइनल परीक्षा से वंचित, स्कूल पहुंचकर जताया विरोध

    बाना हाई स्कूल में 25 छात्र-छात्राएं नौवीं की फाइनल परीक्षा से वंचित, स्कूल पहुंचकर जताया विरोध

    नगर परिषद चुनाव में हार के बाद संगठन पर उठे सवाल, झारखंड आंदोलनकारी विजय ठाकुर ने जताई नाराजगी

    चैत्र नवरात्र में नरगिर आश्रम में चौथी बार होगा रामकथा आयोजन, चंदन जायसवाल बने समिति के अध्यक्ष

    चैत्र नवरात्र में नरगिर आश्रम में चौथी बार होगा रामकथा आयोजन, चंदन जायसवाल बने समिति के अध्यक्ष
    error: Content is protected !!