Location: Garhwa
गढ़वा : अखिल विश्व गायत्री परिवार गढ़वा जिला के कार्यकर्ताओं की जिलास्तरीय गोष्ठी स्थानीय गायत्री शक्तिपीठ प्रज्ञा नगर कल्याणपुर में आयोजित की गयी। बैठक में अखंड दीप के प्राकट्य एवं माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर पिछले जनवरी माह में हरिद्वार के बैरागी द्वीप में आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी तथा उन संकल्पों को गढ़वा जिले में सफल बनाने के लिए कार्य योजना तैयार की गयी।
गोष्ठी में पलामू उपजोन प्रभारी सच्चिदानंद तिवारी की उपस्थिति में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के सभी आंदोलनों को जिले के प्रत्येक गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। विशेष रूप से गायत्री मंत्र और यज्ञ को घर-घर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
बैठक में आगामी चैत्र नवरात्रि के दौरान सभी प्रखंडों में अधिक से अधिक भाई-बहनों को अनुष्ठान से जोड़ने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा वर्ष 2026 में आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में जिले के लगभग 5000 विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित कराने तथा नवंबर माह तक पूरे जिले में 1051 यज्ञ सम्पन्न कराने का लक्ष्य रखा गया। साथ ही युवा मंडल, महिला मंडल और प्रज्ञा मंडलों की संख्या बढ़ाने, नशा मुक्ति एवं नारी जागरण अभियान को गति देने के लिए वर्षभर का वार्षिक कैलेंडर भी तैयार किया गया।
गोष्ठी में गढ़वा प्रखंड समन्वयक अखिलेश कुशवाहा, श्री बंशीधर नगर से अजीत चौबे, मझिआंव से अशोक विश्वकर्मा, बरडीहा से डॉ. रामनरेश प्रसाद, भवनाथपुर से उपेंद्र गुप्ता, महिला मंडल से शोभा पाठक, अनिता देवी और इंदू सिंह सहित कई कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने क्षेत्रों की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुख्य प्रबंध ट्रस्टी संजय सोनी, प्रो. विवेकानंद उपाध्याय तथा स्कूल ब्राइट फ्यूचर के निदेशक अशोक विश्वकर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन जिला समन्वयक विनोद पाठक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सरयू चंद्रवंशी ने किया।
इस दौरान अशोक विश्वकर्मा, ललसू राम, अनिता देवी, ममता तिवारी और मीना कमलापुरी ने युग संगीत प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए पलामू उपजोन प्रभारी सच्चिदानंद तिवारी ने कहा कि युगद्रष्टा पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की भविष्यवाणी के अनुसार आने वाला समय सतयुग का है और इस सतयुग की स्थापना का दायित्व गायत्री परिजनों को निभाना है। उन्होंने कहा कि सतयुग की वापसी को लेकर किसी को संशय करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन वही लोग इसे देख पाएंगे जो स्वयं को उसके अनुरूप ढाल सकेंगे।
उन्होंने कहा कि समाज में अनीति और अत्याचार के माध्यम से धन अर्जित करने वालों को सावधान हो जाने की आवश्यकता है। आज लोग वास्तविक धर्म से भटकते जा रहे हैं और धर्म के नाम पर आडंबर बढ़ता जा रहा है। धार्मिक आयोजनों की संख्या बढ़ने के बावजूद समाज और संस्कृति का पतन तेज़ी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि गायत्री सद्बुद्धि की देवी हैं और गायत्री महाविद्या को आधार बनाकर ही इस पतन को रोका जा सकता है। इसके लिए लोगों के खान-पान, रहन-सहन और जीवन की दिशा में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने गायत्री परिजनों से समर्पित भाव से समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।












