डाल्टनगंज सीट पर झामुमो के साथ कांग्रेस की तकरार और विश्रामपुर में राजद के साथ, दिलीप सिंह नामधारी कांग्रेस के संपर्क में

रांची : पलामू प्रमंडल में इंडिया गठबंधन के समक्ष सीटों के बंटवारे में मुश्किल आने वाली है। राजद के साथ-साथ कांग्रेस और झामुमो की दावेदारी के कारण परेशानी बढ़ने की उम्मीद है। डाल्टनगंज विधानसभा सीट पर इस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा की भी नजर है। जबकि यह सीट कांग्रेस के पास है। डाल्टनगंज की राजनीति में इंदर सिंह नामधारी के बेटे दिलीप सिंह नामधारी को लेकर काफी हलचल है। दिलीप सिंह नामधारी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्र में दौरा तेज कर दिया है। दिलीप सिंह नामधारी फिलहाल किसी दल में नहीं हैं। लेकिन वह इंडिया गठबंधन से चुनाव लड़ने के लिए प्रयासरत हैं। पहले वह झामुमो के संपर्क में थे पर अब वह कांग्रेस के संपर्क में हैं। इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर पलामू में मामला उलझा हुआ है। डाल्टनगंज सीट पर झामुमो और कांग्रेस की दावेदारी है। 2019 के चुनाव में यह सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। कांग्रेस के केएन त्रिपाठी लगातार दो चुनाव हार चुके हैं। इसलिए इस बार झामुमो डाल्टनगंज सीट पर दावेदारी कर रहा है। लेकिन कांग्रेस सीट छोड़ने तैयार नहीं है। पलामू प्रमंडल में विधानसभा की 9 सीटें हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस कांग्रेस 5, राजद 2 और झामुमो के खाते में दो सीट गई थी। पांच में से कांग्रेस सिर्फ एक ही सीट जीत पाई थी मनिका। इस बार झामुमो पलामू प्रमंडल में कांग्रेस कीसीट में कटौती कर अधिक सीटों पर लड़ना चाह रहा है। कांग्रेस डाल्टनगंज दो बार से हार रही है। इसलिए इस बार झामुमो लड़ने की तैयारी कर रहा है। दिलीप सिंह नामधारी के लिए यह सीट चाह रहा है। इधर, जब दिलीप सिंह नामधारी को यह लगा कि कांग्रेस झामुमो के लिए डाल्टनगंज की सीट नहीं छोड़ सकती है तो अब वह कांग्रेस के संपर्क में हैं। कांग्रेस के पास भी यहां कोई मजबूत दावेदार नहीं है। केएन त्रिपाठी को पार्टी चतरा लोकसभा चुनाव लड़ा चुकी है। इसलिए उनके नाम पर विचार नहीं हो रहा है। त्रिपाठी को भी पता है कि डाल्टनगंज से इस बार टिकट लेना मुश्किल होगा। इसलिए वह विश्रामपुर से टिकट के लिए प्रयासरत हैं। कांग्रेस से बिट्टू पाठक सहित कई दावेदार हैं। दिलीप सिंह नामधारी के लिए उनके पिता इंदर सिंह नामधारी पर लगे हुए हैं। बिश्रामपुर पर इस बार राजद दावेदारी कर रहा है। क्योंकि यहां कांग्रेस के टिकट पर कई बार चुनाव लड़ चुके ददई दुबे अब काफी कमजोर हो चुके हैं। उम्र भी हो अधिक हो गई है और अब पहले जैसा जनाधार भी नहीं रहा। पिछले चुनाव में वह पांचवें नंबर पर थे। पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे नरेश सिंह राजद में हैं। इसलिए राजद उनके लिए यह सीट चाह रहा है। आरजेडी के प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम दास सिंह भी यहां से एक मजबूत दावेदार हैं। वह भी तीन-चार वर्षो से चुनावी तैयारी में लगे हुए हैं। इन दोनों नेताओं के लिए राजद सीट चाह रहा है।इधर, इस बार झारखंड मुक्ति मोर्चा भवनाथपुर सीट से भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। पिछली बार यह सीट कांग्रेस के पास थी। कांग्रेस को यहां बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था।कांग्रेस के पास कोई मजबूत दावेदार नहीं है। मानस सिंह कांग्रेस से चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन क्षेत्र में उनकी कोई पहचान नहीं है। इसलिए माना जा रहा है कि भवनाथपुर सीट कांग्रेस झामुमो के लिए छोड़ सकती है। झामुमो से अनंत प्रताप देव उर्फ छोटे राजा चुनाव लड़ेंगे। छोटे राजा काफी पहले ही पार्टी में शामिल हो चुके हैं और क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपना चुनाव प्रचार अभियान तेज कर दिया। भवनाथपुर तो कांग्रेस आसानी से छोड़ सकती है। लेकिन डाल्टनगंज सीट छोड़ने के लिए जल्द तैयार नहीं होगी। इसलिए यह माना जा रहा है कि इस सीट पर दोनों दलों के बीच टकराव निश्चित हैlइधर, राजद के साथ भी झारखंड मुक्ति मोर्चा अंदर-अंदर गेम कर रहा है। राजद इंडिया गठबंधन में इस बार रहेगा कि नहीं यह कहना मुश्किल है। क्योंकि पिछली बार के मुकाबले इस बार अधिक सीट चाह रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा खुद इस बार अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए गठबंधन दलों पर दबाव बनाए हुए है। इंडिया गठबंधन में सीटों के बंटवारे का पेच आसानी से नहीं सुलझने वाला है। पलामू प्रमंडल में झामुमो की तरफ से मंत्री मिथलेश ठाकुर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे । सीट शेयरिंग और टिकट बंटवारे में उनकी राय को अहम माना जाएगा। पलामू प्रमंडल में मिथलेश ठाकुर ने पिछले दो-तीन वर्षों में कई लोगों को झामुमो के साथ जोड़ा है।

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  • Sunil Singh

    Sunil Singh is Reporter at Aapki khabar from Ranchi, Jharkhand.

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