Location: रांची
रांची/गढ़वा/पलामू। झारखंड और बिहार दोनों राज्यों में मंत्री रह चुके कद्दावर नेता, मजदूरों के दमदार स्वर और विश्रामपुर विधानसभा से कई बार विधायक रहे चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे अब हमारे बीच नहीं रहे। शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर फ्लाइट से दिल्ली से रांची लाया गया। राजधानी स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर उनके स्वागत में हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उमड़ पड़े। सभी ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की।
वहां से उनका पार्थिव शरीर रांची कांग्रेस भवन ले जाया गया, जहां पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें अंतिम विदाई दी। शाम को उनका शव रांची स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर रांची से पलामू और गढ़वा होते हुए वाराणसी ले जाया जाएगा, जहां पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
राजनीति में ईमानदारी की मिसाल थे ददई दुबे
चंद्रशेखर दुबे ने राजनीति में गांव से शुरुआत की थी। वे पहले मुखिया चुने गए, फिर सीधे विश्रामपुर से विधायक और बाद में सांसद भी बने। उन्होंने बिहार और झारखंड दोनों राज्यों में मंत्री पद संभाला। वह भारतीय राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे और कोयलांचल समेत कई इलाकों में मज़दूरों के हक़ की लड़ाई लड़ी।
विश्रामपुर में उनकी छवि एक दबंग, जुझारू और निडर नेता की रही। उनका राजनीतिक संघर्ष बाहुबली नेता विनोद सिंह के साथ हुए टकरावों के लिए भी जाना जाता है। विनोद सिंह की हत्या के बाद ददई दुबे ने जन आंदोलन और मजदूरों की राजनीति की ओर रुख किया।
उन्होंने कभी भ्रष्टाचार से समझौता नहीं किया। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन में कोई गंभीर आरोप नहीं लगे। अधिकारियों से सीधी टक्कर लेने वाले नेता के तौर पर उनकी छवि रही। जब हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री रहते हुए उन्होंने कुछ विवादास्पद बयान दिए, तब उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया गया, लेकिन उन्होंने कभी भी झुकने की राजनीति नहीं की।
एक युग का अंत
ददई दुबे ने राजनीति को कभी व्यवसाय नहीं बनने दिया। वे जनता के लिए जिए, और जनता के लिए संघर्ष करते रहे। आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, पलामू प्रमंडल की राजनीति एक शून्यता महसूस कर रही है। उनके निधन से झारखंड और बिहार दोनों राज्यों में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र को भारी क्षति पहुंची है।
उनकी स्मृतियां, संघर्ष और सेवा हमेशा याद रखी जाएगी।











