रांची: राज्यसभा चुनाव का परिणाम आते है ही झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. सरकार के भविष्य और नए सत्ता समीकरण को लेकर चर्चा शुरू हो गई है. इंडिया गठबंधन में तनाव और तकरार की स्थिति है. अविश्वास की खाई गहरी हो गई है. क्रॉस वोटिंग को लेकर गठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और माले के बीच आरोप प्रत्यारोप तेज हो गया. गद्दार, विश्वासघात, थैली और तूमताम जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा की भूमिका पर भी शक की सुई घूम रही. कांग्रेस की रणनीति और प्रबंधन पूरी तरह फेल हो गई. कांग्रेस के नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भरोसा कर जीत का सपना देखते रहे. सहयोगी दलों को भरोसा में नहीं लिया सब कुछ मुख्यमंत्री के भरोसे छोड़ दिया.
राजद कोटे के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने तो प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि राजू जब-जब झारखंड आते हैं थैली भरकर ले जाते हैं. और दूसरे पर आरोप आप लगा रहे हैं. इधर कांग्रेस ने गद्दारों और भीतरघातियों की पहचान करने की कार्रवाई शुरू कर दी है. गठबंधन की समीक्षा की भी बात कांग्रेस ने की है.
कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस प्रभारी के राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश सहित कई कांग्रेसी नेता गुरुवार की रात मुख्यमंत्री हाउस गए. वहां उनसे मिलकर क्रॉस वोटिंग पर चर्चा की और सीधे-सीधे क्रॉस वोटिंग के लिए राष्ट्रीय जनता दल और माले के विधायकों को जिम्मेदार बताया. मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों की पहचान कर कार्रवाई की जाए.
कांग्रेस की हार के बाद गठबंधन की गांठ ढीली पड़ गई और तार -तार हो गई है. चुनाव के बहाने गठबंधन के भीतर चल रहे असंतोष भी सामने आ गया है. गठबंधन के लोग एक दूसरे पर थैली लेकर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगा रहे हैं .
इधर, कांग्रेस के आरोपों का माले ने भी जवाब दिया है. पार्टी महासचिव दीपंकर घोष ने साफ-साफ कहा है कि हमारे विधायकों ने क्रॉस वोटिंग नहीं की है. राष्ट्रीय जनता दल के विधायक और नेता भी यही दावा कर रहे हैं कि उन्होंने गठबंधन धर्म का पालन किया और क्रॉस वोटिंग नहीं की. आरोप बेबुनियाद है.
यानी एक दूसरे पर क्रॉस वोटिंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा को भी लपेटे में लिया जा रहा है. झामुमो ने अपने प्रत्याशी बैजनाथ राम को 30 वोट दिलवा दिए. इस पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि जब 28-28 वोट दोनों प्रत्याशियों के बीच आवंटित करने की बात थी तो फिर झामुमो ने 30 वोट अपने प्रत्याशी को कैसे दिला दिए. कांग्रेस के खाते से जो दो वोट की कमी हुई इसकी पूर्ति कहां से होती. यहां भी खेल हो गया.
इंडिया गठबंधन के विधायकों ने न सिर्फ क्रॉस वोटिंग की बल्कि जो तीन वोट रद्द किए गए वह भी गठबंधन के विधायकों के ही बताए जा रहे हैं. एक रणनीति के तहत ही विधायकों ने अपना वोट रद्द कराया. तमाम प्रशिक्षण के बाद वोट रद्द कैसे हो गए. यह बड़ा सवाल है.
चर्चा सरकार के भविष्य और नए सत्ता समीकरण की भी शुरू हो गई है. फिलहाल तो सरकार पर कोई खतरा नहीं है. लेकिन अगले एक-दो महीने में सत्ता समीकरण बदल जाए तो आश्चर्य नहीं होगा. राजनीति और अब इसी दिशा की ओर बढ़ रही है. कांग्रेस फिलहाल सरकार से समर्थन वापस नहीं लेगी यह तय है.
प्रणव झा कांग्रेस हाई कमान के प्रत्याशी थे. यानी कांग्रेस की हार हाई कमान की हार है. आंकड़े के बावजूद कांग्रेस सीट नहीं जीत सकी. कांग्रेस और इसके रणनीतिकार गठबंधन के अंदर का खेल नहीं समझ सके और गच्चा खा गए. हेमंत सोरेन के नेतृत्व पर भी सवाल खड़ा हो गया है कि वह गठबंधन के विधायकों को एकजुट नहीं रख सके.











