मानव मूल्यों के दर्शन का महाकाव्य है रामायण : प्राचार्य

Location: Shree banshidhar nagar


श्री बंशीधर नगर। टीडीएम इंटर कॉलेज में मंगलवार को महर्षि बाल्मीकि की जयंती मनाई गई। इसका उद्घाटन प्राचार्य धनंजय सिंह ने बाल्मीकि जी की तस्वीर पर पुष्पार्चन कर किया। कॉलेज के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षक- कर्मचारियों ने भी महर्षि बाल्मीकि की तस्वीर पर पुष्पार्चन किया एवं आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर प्राचार्य धनंजय सिंह ने कहा कि महर्षि बाल्मीकि त्रिकालदर्शी थे। उनकी उपस्थिति सतयुग, त्रेता और द्वापर युग थी। उन्होंने महाकाव्य रामायण की रचना की थी। जिसमें हम सब के आदर्श भगवान श्री राम के मर्यादा का दर्शन है। महाकाव्य में युद्ध का वर्णन है तो प्रकृति के संरक्षण पर भी बल दिया गया है। मानव मूल्यों के पथ प्रदर्शक के रूप में इस महाकाव्य में सम्पूर्ण संसार को मानवता का बड़ा संदेश दिया गया है। पारिवारिक रिश्ता से लेकर राजधर्म तक की सम्पूर्ण गाथा से ओत प्रोत रामायण में आसुरी शक्तियों पर सत्य का विजय की यशगान अंकित है। आखिर इतना बड़ा महाकाव्य लिखने की प्रेरणा और सामर्थ महर्षि बाल्मीकि को कहां से मिली यह प्रश्न भी मन में उठ रहा होगा। अन्य वक्ताओं ने कहा कि दरअसल बाल्मीकि का नाम रत्नाकर था। वे लूटपाट और डकैती जैसे अमानवीय कार्य में लगे हुए थे। जंगल के रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों को वे हथियार का भय दिखाकर लूट लेते थे। एक बार नारद मुनि भी उस रस्ते से गुजर रहे थे। उन्हें भी रत्नाकर ने लुट लिया। नारद जी ने रत्नाकर से पूछा लुटे हुए धन का उपयोग कौन कौन करते हैं। रत्नाकर ने बताया उनके माता पिता और घर के सभी सदस्य। फिर नारद जी ने पूछा इस घिनौने कार्य से जो पाप पैदा हो रहे हैं उसमें कौन कौन भागीदार होगा। रत्नाकर बोले माता पिता से पूछना होगा। रत्नाकर नारद जी को एक पेड़ में बांध कर घर चले गए। उधर से लौटकर रत्नाकर ने नारद जी को बताया कि पाप का भागी कोई बनने को तैयार नहीं है। नारद जी के समझाने पर रत्नाकर ने ब्रह्मा जी की उपासना शुरू की। तपस्या के दौरान उनके शरीर पर दीमक का दो परत जम गया था। ब्रह्मा जी ने इसी अवस्था में उन्हें दर्शन दिया। उनका नाम बाल्मीकि रखा। साथ ही उन्हें रामायण लिखने की प्रेरणा दी। वक्ताओं में शिक्षक वरुण कुमार पांडेय, उमेश सिंह,अमरेश यादव, कमलेश कुमार, सुनील सोनी, एसएमएसडी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रशांत सहाय के नाम शामिल थे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षा विवेक कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम में शिक्षा प्रतिनिधि राजीव रंजन प्रताप देव, प्रणय कुमार देव,जूही कुमारी, ममता सोनी, रजनीश कुमार, शैलेन्द्र प्रताप देव, अमित कुमार सिंह, नवनीत कुमार सिंह, श्वेता सिंह, राहुल कुमार, जितेंद्र कुमार, परवीन पासवान, रामपवन जी, विकास कुमार देव, विनेश पल सहित महाविद्यालय के कई शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र- छात्राएं उपस्थित थीं।

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  • Dinesh Pandey

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