Location: रांची
रांची/गढ़वा: मंडल डैम परियोजना को लेकर झारखंड के गढ़वा जिले में विस्थापन का मुद्दा तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के रंका प्रखंड के बिश्रामपुर तथा रमकांड प्रखंड के बालीगढ़ पंचायत के ग्रामीणों और मंडल डैम से प्रभावित दर्जनों विस्थापित परिवारों ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं और न्याय की मांग की।
यह मुलाकात गढ़वा विधायक सत्येन्द्र नाथ तिवारी के नेतृत्व में हुई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल थे।
ग्रामीणों ने बताया कि जिस क्षेत्र में विस्थापितों को बसाने की योजना है, वह घना जंगल है और उसके आसपास करीब बीस गांवों के लोग अपनी आजीविका के लिए उसी पर निर्भर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे महुआ संग्रह, जड़ी-बूटी, पत्तल-दोना निर्माण जैसे कार्यों से जीवन यापन करते हैं। ऐसे में उस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पुनर्वास होने से उनके सामने रोज़गार और भरण-पोषण का संकट खड़ा हो जाएगा।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन सरकार के निर्देश पर बलपूर्वक उस जंगल क्षेत्र में विस्थापितों को बसाने का प्रयास कर रहा है, जिससे हजारों आदिवासी परिवार प्रभावित होंगे। उन्होंने मांग की कि विस्थापितों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बसाया जाए।
वहीं, मंडल डैम से प्रभावित विस्थापित परिवारों ने भी प्रस्तावित पुनर्वास स्थल पर जाने से इनकार किया है। उनका कहना है कि वे वर्तमान में जिस क्षेत्र में रहते हैं, वह पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है, जहां उन्हें पेसा कानून के तहत विशेष अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन जहां उन्हें बसाया जा रहा है, वह सामान्य पंचायत क्षेत्र है, जिससे उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा।
विस्थापितों ने यह भी दावा किया कि वे नीलांबर पीतांबर के वंशज हैं और जिस भूमि पर मंडल डैम का निर्माण हो रहा है, उसका ऐतिहासिक संबंध इन अमर शहीदों से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ऐतिहासिक पहचान को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों और विस्थापितों दोनों ने नेता प्रतिपक्ष से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है। इस मुद्दे ने अब सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े बड़े विवाद का रूप ले लिया है।