
Location: Garhwa

गढ़वा जिले में आयोजित श्री बंशीधर महोत्सव अब सांस्कृतिक उत्सव से अधिक राजनीतिक अखाड़ा बनता जा रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस महोत्सव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस तकरार की जड़ मुख्यमंत्री द्वारा महोत्सव के दौरान जिले की विभिन्न 19 विकास योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास को माना जा रहा है, जिसमें गढ़वा कृषि महाविद्यालय परिसर में मल्टीपरपस स्टेडियम का शिलान्यास प्रमुख है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष में श्रेय लेने की होड़
इस महोत्सव को लेकर सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है। एक ओर, सत्तारूढ़ दल इसे अपनी उपलब्धि बताने में जुटा है, तो दूसरी ओर, विपक्ष भाजपा इस महोत्सव की शुरुआत का श्रेय लेने की कोशिश कर रहा है। विपक्ष का दावा है कि इसकी शुरुआत 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में हुई थी, जिसमें सांसद विष्णु दयाल राम और विधायक भानु प्रताप शाही की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
महोत्सव के बहिष्कार से बढ़ी सियासी तल्खी
विपक्षी दलों ने इस बार महोत्सव से पूरी तरह दूरी बना ली और इसका बहिष्कार किया। इससे साफ संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गहराने वाला है। विपक्ष का आरोप है कि यह महोत्सव अब सार्वजनिक न होकर सत्ता पक्ष का निजी आयोजन बन गया है।
विपक्षी विधायक को चिढ़ाने की रणनीति?
इस महोत्सव के दौरान गढ़वा विधानसभा से जुड़ी विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास ऑनलाइन तरीके से किया गया,ताकि ऐसी योजना के उद्घाटन शिलान्यस का श्रेय लेने से गढ़वा के विधायक को वंचित किया जा सके,और गढ़वा विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की रणनीति बताया जा रहा है।
राजनीति की भेंट चढ़ता सांस्कृतिक उत्सव
एक समय यह महोत्सव गढ़वा जिले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को समर्पित उत्सव था, लेकिन अब यह राजनीतिक श्रेय लेने और विपक्ष को कमजोर करने का मंच बन गया है। यदि यह राजनीतिक खींचतान इसी तरह जारी रही, तो भविष्य में बंशीधर महोत्सव की मूल भावना कहीं खो न जाए, यह चिंता का विषय है।