Location: Meral
मेराल। प्रतिनिधि। खरीफ मौसम में खाद की मांग बढ़ने के साथ ही मेराल प्रखंड में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर यूरिया और डीएपी खाद बेचे जाने के आरोप सामने आए हैं। किसानों का आरोप है कि कई खाद-बीज दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूली जा रही है, जिससे खेती की लागत बढ़ने के साथ किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
बाना गांव निवासी किसान यासीन अंसारी और गयासुद्दीन अंसारी ने आरोप लगाया कि बाना गांव में कन्हाई राम की खाद-बीज दुकान पर खाद की कीमत पूछने पर निर्धारित दर से अधिक कीमत बताई गई। किसानों के अनुसार उन्होंने मेराल प्रखंड के कई खाद दुकानों में जाकर यूरिया और डीएपी की कीमत की जानकारी ली। इस दौरान कई दुकानदारों द्वारा निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद देने की बात कही गई।
किसानों के अनुसार यूरिया की निर्धारित कीमत 266 रुपये प्रति बोरी है, जबकि बाना में कथित रूप से 430 रुपये और मेराल में करीब 400 रुपये प्रति बोरी की कीमत बताई जा रही है। इसी तरह डीएपी की निर्धारित कीमत 1,350 रुपये प्रति बोरी है, जबकि किसानों से कथित तौर पर 2,200 रुपये तक वसूले जाने की बात कही जा रही है। इस हिसाब से यूरिया पर करीब 164 रुपये और डीएपी पर करीब 850 रुपये प्रति बोरी अतिरिक्त वसूले जाने का आरोप है।
किसान यासीन अंसारी ने बताया कि बाना गांव की खाद-बीज दुकान के संबंध में शिकायत के बाद उन्होंने मेराल की अन्य दुकानों में भी खाद की कीमतों की जानकारी ली। उनका दावा है कि कई दुकानों पर निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने की बात सामने आई है।
गौरतलब है कि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बिक्री की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। किसानों का कहना है कि पूर्व में भी शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से दुकानदारों के हौसले बढ़े हैं। यदि पहले ही मामलों की जांच कर कार्रवाई की जाती तो किसानों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ता।
इस पूरे मामले ने खाद दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि खाद की बिक्री सीधे उनके आर्थिक हित से जुड़ी है। ऐसे में दुकानों की नियमित जांच कर निर्धारित दर पर खाद की बिक्री सुनिश्चित करना जरूरी है।
इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी खुशबू पासवान ने कहा कि किसान इस संबंध में लिखित आवेदन देते हैं तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्थिति में दुकानदार सरकारी निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद नहीं बेच सकते।
किसानों ने संबंधित विभाग से खाद दुकानों के स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर, खरीद-बिक्री मूल्य और किसानों को दी जा रही रसीदों की जांच कराने की मांग की है। साथ ही दुकानों पर निर्धारित मूल्य स्पष्ट रूप से प्रदर्शित कराने और खाद खरीदने वाले प्रत्येक किसान को अनिवार्य रूप से रसीद उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बिक्री के आरोपों की वास्तविकता सामने आ सके।











