
Location: Shree banshidhar nagar
श्री वंशीधर नगर के जतपुरा ग्राम निवासी इंदीवर शुक्ल ने अपनी प्रतिभा और परिश्रम से शिक्षा और नेतृत्व के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। वे बीआरसी काण्डी के लेखापाल श्री प्रदीप कुमार शुक्ल और सहायक अध्यापिका श्रीमती कुमारी इंदू के पुत्र हैं।
शैक्षणिक सफर की शुरुआत से सफलता तक
इंदीवर ने अपनी शिक्षा की नींव डीएवी भवनाथपुर टाउनशिप से रखी, जहां उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में 10 सीजीपीए प्राप्त किया। इसके बाद, उन्होंने डीपीएस रांची से उच्च माध्यमिक शिक्षा प्रथम श्रेणी में पूरी की। अपनी उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ से न्यायिक विज्ञान में स्नातक किया, जिसमें भी उन्होंने प्रथम श्रेणी हासिल की।
नेतृत्व और छात्र राजनीति में प्रभावशाली योगदान
शिक्षा के साथ-साथ इंदीवर ने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में उनकी सक्रियता ने उन्हें केंद्रीय विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के मंत्री पद तक पहुंचाया। इसके अलावा, वे एबीवीपी छत्तीसगढ़ के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और विकासार्थ विद्यार्थी छत्तीसगढ़ के प्रांत संयोजक के रूप में भी काम कर चुके हैं। वर्तमान में, वे एबीवीपी की केंद्रीय कार्यसमिति के सदस्य और विकासार्थ विद्यार्थी के राष्ट्रीय सह संयोजक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
गांव की मिट्टी से निकला राष्ट्रीय सितारा
इंदीवर शुक्ल अपने दादा-दादी, सेवानिवृत्त शिक्षक श्री तीर्थराज शुक्ल और श्रीमती पार्वती देवी के आशीर्वाद और मार्गदर्शन से आगे बढ़े। एक छोटे से गांव से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनकी नेतृत्व क्षमता और छात्रहित के प्रति समर्पण ने उन्हें एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में स्थापित किया है।
इंदीवर शुक्ल का जीवन यह संदेश देता है कि मेहनत, शिक्षा और नेतृत्व की क्षमता से कोई भी व्यक्ति अपनी पहचान को बुलंदियों तक पहुंचा सकता है।