गढ़वा में नगर निकाय चुनाव को लेकर अब माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका है यद्यपि यह चुनाव राजनीति पार्टी के सिंबल के आधार पर नहीं है बावजूद इसके भाजपा एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसी पार्टियों एडी चोटी का जोर लगाकर अपनी राजनीतिक वर्चस्व कायम करने के लिए निकाय चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनकर लड़ रहे हैं जिला मुख्यालय गढ़वा से जुड़े गढ़वा नगर परिषद में अब तक जो चुनावी परिदृश्य सामने देखने को मिल रहा है उसमें अचानक भाजपा ने अपने प्रत्याशी कंचन जायसवाल का ग्राफ बढ़ाने में काफी हद तक कामयाबी हासिल कर ली है इससे इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि शुरुआती दौर में ही यहां भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा ने आकर कार्यकर्ताओं को मोटिवेट किया था फिर अरुण सिंह राष्ट्रीय महामंत्री गढ़वा आकर माहौल में और गर्माहट लाई थी,
स्थानीय विधायक सत्येन्द्र नाथ तिवारी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर कंचन जायसवाल के लिए काम कर रहे हैं और आज रघुवर दास गढ़वा पहुंच रहे हैं उनके आने की सूचना मात्र से ही विपक्षी दलों में घबराहट साफ दिखने लगी है ऐसे में भाजपा गढ़वा में चुनाव में एक मजबूत कड़ी के रूप में देखने को मिल रहा है भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल की भी चर्चा तेजी से होने लगी है हालांकि भाजपा के सामने शुरुआती दौर से ही पूरे दमखम से चुनाव लड़ रहे भाजपा के ही वरिष्ठ नेता अलखनाथ पांडे बड़ा रोड़ा बनकर जो खड़े हैं और मजबूती से चुनाव मैदान में अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं श्री पांडे की छवि एक शिक्षाविद के साथ-सा द समाजसेवी की रही है उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि भी गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में जानी पहचानी है भाजपा का एक खेमा यदि साफ-साफ कहें तो संसद का खेमा अलखनाथ पांडे के साथ पुरी सक्रियता के साथ चुनाव कंपेनी में जुटी है ऐसे में भाजपा दूसरों से लड़ने के बजाय अपनों से ही गढ़वा नगर निकाय क्षेत्र में लड़ रही है ऐसा कहा जाना अन्यथा नहीं होगा लिया जाए गढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा भाजपा से ही लड़ रही है क्या कहा जाना सही होगा जहां तक झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रश्न है झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी संतोष केसरी अपने आप में ही एक हैवीवेट प्रत्याशी के रूप में शुरू से ही माने जा रहे थे क्योंकि संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी लगातार दो बार से गढ़वा नगर परिषद की अध्यक्ष रही है ऐसे में संतोष केसरी भी इस चुनाव में एक बड़ा फैक्टर के रूप में स्वयं थे ऊपर से झारखंड मुक्ति मोर्चा का उन्हें समर्थित प्रत्याशी बनाया जाना और उनके पक्ष में पूर्व मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर का एड़ी चोटी का जोर लगाना गढ़वा नगर परिषद में चुनावी प्रदेश को एक नए समीकरण की ओर ले जा रहा है परंतु संतोष केसरी के सामने भी एक एक नहीं बल्कि दो दो बड़े रोड के बजाय यूं कहे की दीवार पार्टी के ही प्रत्याशी मोहम्मद मासूम राजा तथा निवर्तन पूर्व अध्यक्ष अनिता दत है मासूम भी झारखंड मुक्ति मोर्चा से ताल्लुक रखते हैं तथा मुस्लिम समुदाय का चेहरा है ऐसे में जबकि अनीता तक गढ़वा नगर परिषद की अध्यक्ष रह चुकी है और पिछले चुनाव में महज 56 वोट से पराजित पिंकी केसरी से हुई थी ऐसे में दोनों दमदार उम्मीदवार झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए किरकिरी बनाकर दिख रहे हैं तथा यह कहा जा सकता है कि जिस तरह से भाजपा अपनों से ही लड़ रही है वैसे झारखंड मुक्ति मोर्चा भी गढ़वा नगर परिषद चुनाव में अपनों से ही लड़ने में हल्कान है गढ़वा नगर परिषद में उन प्रत्याशियों के अलावा दौलत सोनी की नाम भी चर्चा में है दौलत सोनी भी नौजवानों की टीम लेकर पूरे चुनावी समीकरण को अपने पक्ष में समीकरण बैठने में मजबूती से दिख रहे हैं स्वजातीय मतों के अलावा टंडवाके 4 वार्ड 18 ,19, 20 तथा 21 में अपना मजबुपकड़ महसूस कर ओभरकन्फिडेंस में हैं। ऐसे में कौन बाजी मारेगी फिलहाल तो कहना कठिन है परंतु गढ़वा में चतुष्कोणीय कांटे की मुकाबला दिख रहा महसूस किया जा रहा है











