Location: रांची
रांची: झारखंड में पिछले कुछ दिनों से बड़े पैमाने पर अधिकारियों की ट्रांसफर- पोस्टिंग हो रही है. ट्रांसफर- पोस्टिंग को लेकर कुछ कायदे कानून हैं. लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है. सरकार अपने हिसाब से ट्रांसफर- पोस्टिंग कर रही है. जब नियमों का पालन नहीं होगा तो सवाल उठेगा. सरकार की कार्यशैली, मनमानी और अधिकारियों की कार्य क्षमता पर भी.
बेवजह और लगातार ट्रांसफर- पोस्टिंग से सवाल उठ रहे हैं और चर्चाओं का बाजार भी गरम है. एक महीने के अंदर तीन जिलों के डीसी बदल दिए गए. जिन जिलों के डीसी बदले गए वहां के लोग और जनप्रतिनिधि भी यह सोच रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि गढ़वा, देवघर और खूंटी के डीसी बदल दिए गए.
गढ़वा के डीसी अन्नय मित्तल एक महीने के अंदर ही बेहतर काम करते दिख रहे थे. दूर-दराज के इलाकों का दौरा कर विकास की जमीनी हकीकत, शिक्षा की व्यवस्था और स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति की जानकारी ले रहे थे. लोगों से मिलने जुलने और संवाद का तरीका भी वहां के लोगों को पसंद आ रहा था. जब तक वह जिले को समझ पाते उसके पहले ही उनका ट्रांसफर हो गया. गढ़वा के इतिहास में पहली बार कोई डीसी एक महीने के अंदर हटा दिया गया.
गढ़वा जिले के लोग यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ की डीसी बदल दिए गए. जनप्रतिनिधियों से भी जानकारी ले रहे हैं कि कहीं किसी विधायक ने तो ट्रांसफर नहीं कराया. लेकिन ऐसी कोई बात नहीं है. किसी विधायक को भी ट्रांसफर के बारे में सही जानकारी नहीं है. न किसी ने मुख्यमंत्री से मित्तल की शिकायत की थी. मित्तल तो अभी पूरी तरह लोगों को जान समझ भी नहीं पाए थे. लेकिन हटा दिया गया. अब हटाए जाने पर तरह-तरह के सवाल लोग उठा रहे हैं. पूछ रहे हैं. गढ़वा से लेकर रांची तक वजह की तलाश हो रही है. पत्रकारों से भी वजह पूछा जा रहा है. देवघर और खूंटी जिले के लोग भी हैरान हैं.
झारखंड में ट्रांसफर-पोस्टिंग को एक उद्योग और कमाई का जरिया माने जाने लगा है. यह बात किसी से छिपी हुई नहीं है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग कैसे होती है. हर सरकार में एक नेटवर्क तैयार हो जाता है. लक्ष्मी की कृपा ही सब कुछ है. ऐसे लोग जिलों में जाते हैं तो उनका उद्देश्य अपने कार्यों से अधिक धन कमाने में रहता है.
अभी दो-तीन दिन पहले एक बड़े ठेकेदार से बात हो रही थी. उस ठेकेदार को सड़क निर्माण का काम मिला है. बता रहे थे कि एक जिले के कुछ बड़े अधिकारियों की इतनी बड़ी डिमांड है की पूरा करना संभव नहीं है. इसलिए काम रुका हुआ है.
लगातार और बिना वजह ट्रांसफर- पोस्टिंग से अधिकारियों का मनोबल गिरता है. जिन जिलों के डीसी एक महीने के अंदर हटा दिए गए उनकी मनोदशा क्या होगी. समझा जा सकता है. क्या वह अक्षम हैं? यदि अक्षम हैं तो सरकार ने उनकी पोस्टिंग क्यों की? क्या सरकार को इन अधिकारियों के संबंध में जानकारी नहीं थी. बिना जाने जिलों की कमान दे दी गई.
झारखंड को अगर विकास के रास्ते पर जाना है तो अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्ट में पारदर्शिता बरतनी होगी. अच्छे अधिकारियों को आगे लाना होगा. तभी विकास होगा नहीं तो फिर सब कुछ वैसा ही चलता रहेगा जैसा चल रहा है. सरकार को जरूर इस विषय पर सोचना चाहिए. झारखंड में काम करने वाले अधिकारियों का मनोबल गिरा हुआ है और धन कमाने वाले का मनोबल ऊंचा है. ऐसे में भ्रष्टाचार मुक्त शासन की कल्पना कैसे की जा सकती है. यह बड़ा सवाल है.