Location: Garhwa
गढ़वा : गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में बुधवार की शाम गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने रामकथा के तीसरे दिन प्रयागराज में याज्ञवल्क्य ऋषि और भारद्वाज ऋषि के संवाद के माध्यम से रामकथा सुनायी. उन्होंने कहा कि माघ मेले में जब सूर्य मकर राशि में रहते हैं, त्रिवेणी के संगम प्रयागराज में प्राचीन काल से स्नान एवं समाज की समस्याओं पर विचार-विमर्श के लिये ऋषियों के इकट्ठा होने की परंपरा रही है. कोने-कोने से ऋषि प्रयागराज पहुंचते थे और वहां महीने भर ऋषियों के बीच समाज की समस्याओं पर विचार-विमर्श होता था. समाज की हर समस्याओं का समाधान निकालने का प्रयास किया जाता था. इसके बाद वहां लिये गये निर्णयों को लागू करने के लिये सभी ऋषि अपने-अपने क्षेत्र में चले जाते थे. उन्होंने कहा कि हमारे ऋषियों का कितना आदर्श जीवन था. वे जीवनभर जो अपनी तपस्या, चिंतन से ज्ञान प्राप्त होता था, उसका उपयोग समाज हित में किया करते थे. एक समय इसी तरह प्रयागराज में जब याज्ञवल्क्यजी माघ मेले में पहुंचे थे, वे जब लौटने के हुये, भारद्वाजजी के विशेष आग्रह पर वे कुछ दिनों के लिये और वहां रूक गये और उनको उन्होंने रामकथा सुनाकर उनके जिज्ञासा को शांत किया था. श्री पाठक ने कहा कि रामकथा में सती के शरीर त्याग का प्रसंग बड़ा ही हृदयविदारक है. श्री पाठक ने कहा कि चाहे मनुष्य हों अथवा देवता होनी को कोई नहीं टाल सकता है. यह बात स्वयं भगवान शिव ने कही है. भगवान शिव ने राजा राम के अवतारी लीला पर जिस प्रकार भवानी सती ने संदेह उत्पन्न कर उनकी परीक्षा लेनी चाही थी, इसपर भ्रगवान शिव ने कहा था किसी के जीवन में घटित घटनायें पूर्व से निर्धारत रहती हैं. जिसके कारण मनुष्य हों अथवा देव, सभी वहीं करते हैं, जो नियति ने उनके लिये तय कर रखा है. होइहि सोई जो राम रचि राखा, को करि तर्क बढावै साखा…चौपाई के माध्यम से तुलसीदास ने शिवजी की बात कही है. उन्होंने कहा कि भवानी सती भी नियति के आगे बिवश थीं. जिसके कारण उन्होंने वनवास काल में सीताजी की खोज में भटकते राम-लक्ष्मण को देखकर उनपर संशय किया और भगवान शिव की बात पर विश्वास नहीं हुआ और दोनों भाइयों की परीक्षा लेने के लिये चली गयी. इसके बाद दुबारा उन्होंने भगवान शिव के समझाने के बावजूद निमंत्रण नहीं मिलने के बावजूद अपने पिता दक्ष के यज्ञ उत्सव में भाग लेने चली गयी. संगीतमय चौपाई और छंदों के साथ सती के राजा दक्ष के यज्ञ उत्सव में योगाग्नि में जलकर सती के शरीर त्याग की कथा सुनकर श्रोता काफी भावुक हो गये.
उठो जागो यू ट्यूब चैनल का लोकार्पण हुआ
युवाओं को सही दिशा देगा उठो-जागो चैनल : संजय कुमार
गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में ओम समिति द्वारा आयोजित रामकथा के मंच से बुधवार की शाम गढ़वा अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने गायत्री परिवार के उठो-जागो नाम से यू ट्यूब चैनल का लोकार्पण किया. इस अवसर पर एसडीओ संजय कुमार ने कहा कि गायत्री परिवार का सोच काफी सराहनीय है. उन्होंने कहा कि आज के इस इलेक्ट्रॉनिक युग में हमें समाज में काम करने के लिये विज्ञान के नयी-नयी संचार तकनीक का सहारा लेना होगा. ऋषियों की वाणी को और अपने प्रयासों को जन-जन तक पहुंचाने के लिये सोशल मीडिया प्रभावी भूमिका निभायेगा. उन्होंने कहा कि उठो जागो यह कठोपनिषद से लिया गया शब्द है. इसके अर्थ बड़े व्यापक हैं. स्वामी विवेकानंद ने भी कठोपनिषद के ही शब्द को उठो जागो और तबतक आगे बढ़ो, जबतक तुम अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच जाओ…लिया था. उन्होंने कहा कि उठो जागो का मतलब युवाओं की छुपी हुई प्रतिभा का एहसास कराकर उन्हें जगाना है. ताकि उन्हें अपने क्षमता को बोध हो और उसका उपयोग कर वे लक्ष्य तक पहुंच सकें. जैसे कभी जामवंतजी ने समुद्र लांघने के लिये हनुमानजी की क्षमता का एहसास कराकर उन्हें जगाया था. एसडीओ ने कहा कि वे यहां के ओम समिति के सदस्यों के प्रयास से काफी प्रभावित हैं. उन्होंने काफी हर्ष व्यक्त करते हुये चैनल के संचालक मिथिलेश कुशवाहा को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया. इसके पूर्व ओम समिति के सदस्यों ने अनुमंडल पदाधिकारी को गायत्री मंत्र के चादर ओढ़ाकर उनका स्वागत किया. इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार विवेकानंद उपाध्याय, सरयू चंद्रवंशी, अखिलेश कुशवाहा, प्रभुदयाल प्रजापति, शोभा पाठक, अनिता देवी, मीना कमलापुरी, पुनम चौबे, सहित काफी संख्या में महिला-पुरूष उपस्थित थे.












