Location: Garhwa
श्री बंशीधर नगर में आभूषण व्यवसायी दीपक राज सोनी पर लूट की नीयत से अपराधियों द्वारा चलाई गई गोली ने पूरे क्षेत्र की कानून–व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संध्या बेला में हुई इस घटना से व्यवसायी वर्ग खास तौर पर सहमा हुआ है। लोगों का कहना है कि अपराधियों के हौसले जहां लगातार बुलंद हैं, वहीं पुलिस की कार्यशैली उतनी ही ढीली पड़ती दिखाई दे रही है।
घटना के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज है, पर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या गढ़वा पुलिस अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों को सही ढंग से निभा पा रही है। यह बात अब किसी से छिपी नहीं कि हाल के महीनों में पुलिस की कार्य संस्कृति को लेकर आम जनता में रोष बढ़ा है। इमरजेंसी स्थिति में भी अधिकारियों का फोन न उठाना, मोबाइल की घंटी बजने के बावजूद कॉल को अनसुना कर देना, पुलिस तंत्र की कमजोर होती संवेदनशीलता का प्रतीक बन चुका है।
लोगों का कहना है कि पहले ऐसे हालात कम देखने को मिलते थे, लेकिन अब यह आम अनुभव बन गया है कि चाहे जितनी बड़ी जरूरत हो, पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी फोन रिसीव नहीं करते। यह स्थिति न केवल कानून–व्यवस्था के लिए घातक है, बल्कि पुलिस और जनता के बीच बने विश्वास को भी तेजी से तोड़ रही है।
ऐसे हालात में जरूरी है कि पुलिस विभाग अपनी कार्य संस्कृति पर गंभीर मंथन करे। जब तक पुलिस और जनता के बीच मजबूत और सहज संवाद नहीं होगा, तब तक किसी भी इलाके में शांति और सुरक्षा की भावना विकसित नहीं हो सकती। श्री बंशीधर नगर गोलीकांड ने इस सच को और स्पष्ट कर दिया है कि अब समय आ गया है जब पुलिस प्रशासन को अपनी प्राथमिकताओं और जिम्मेदारियों का पुनर्मूल्यांकन करना होगा।











