
Location: Garhwa

गढ़वा: गढ़देवी मोहल्ला स्थित नरगिर आश्रम में चल रही सात दिवसीय रामकथा के पांचवें दिन बालस्वामी प्रपन्नाचार्य जी ने ताड़का वध, अहिल्या उद्धार, धनुष यज्ञ और राम विवाह का आध्यात्मिक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, वैराग्य और भक्ति ईश्वर प्राप्ति के तीन मुख्य मार्ग हैं। सफलता के लिए मन का स्थिर होना आवश्यक है, क्योंकि चंचल मन लक्ष्य प्राप्ति में बाधक बनता है।
कथा के दौरान उन्होंने बताया कि विश्वामित्र जी ने यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से श्रीराम और लक्ष्मण को साथ ले जाने की अनुमति मांगी। पहले दशरथ ने मना किया, लेकिन ऋषि वशिष्ठ के समझाने पर उन्होंने सहमति दे दी। श्रीराम-लक्ष्मण ने यज्ञ की रक्षा की और राक्षसों का संहार किया।
अहिल्या उद्धार की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि ऋषि गौतम के श्राप से अहिल्या पत्थर बन गई थीं, लेकिन श्रीराम के चरण स्पर्श से उनका उद्धार हुआ। पुष्प वाटिका में राम-सीता मिलन का प्रसंग सुनाया गया, जहां सीता जी श्रीराम के अनुपम सौंदर्य पर मुग्ध हो गईं।
धनुष यज्ञ एवं राम विवाह की सुंदर झांकी निकाली गई
कथा में बताया गया कि राजा जनक ने सीता स्वयंवर में शिव धनुष तोड़ने की शर्त रखी थी। अनेक राजा प्रयास में असफल रहे, लेकिन भगवान श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से शिव धनुष को उठाकर तोड़ दिया। इसके बाद परशुराम जी का आगमन हुआ, लेकिन जब उन्हें श्रीराम के विष्णु अवतार होने का ज्ञान हुआ, तो वे शांत होकर वापस लौट गए।
कथा में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि को देखकर समिति के अध्यक्ष चंदन जायसवाल ने हर्ष व्यक्त किया और इसे कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम बताया। कार्यक्रम को सफल बनाने में जगजीवन बघेल, दीनानाथ बघेल, जयशंकर बघेल, गुड्डू हरि, विकास ठाकुर, भरत केशरी, गौतम शर्मा, धर्मनाथ झा, अजय राम, गौतम चंद्रवंशी, सोनू बघेल, पवन बघेल, आशीष बघेल, सुमित लाल, अजय सिंह, राकेश चंद्रा, सूरज सिंह, शांतनु केशरी, शुभम् चंद्रवंशी, सोनू, सुन्दरम्, शिवा आदि का योगदान सराहनीय रहा।