Location: Garhwa
गढ़वा : महर्षि विश्वामित्र राक्षसों का वध करने के लिये और अपने यज्ञ की रक्षा करने के लिये श्रीराम और लक्ष्मण दोनों भाइयों को राजा दशरथ से मांग कर अयोध्या से बक्सर लाये थे. इसके बाद वे न सिर्फ श्रीराम और लक्ष्मण के हाथों ताड़ुका, सुबाहू और मारिच सहित उनके सभी सहयोगी राक्षसों का बध कराये थे, बल्कि इस दौरान विश्वामित्र श्रीराम और लक्ष्मण को गुरूकूल में जो शस्त्र शिक्षा शेष रह गयी थी, उसको भी पूर्ण किये थे. यह बात गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में श्रीराम कथा के दौरान कही. ओम समिति द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के सातवें दिन श्रीराम कथा के दौरान श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा विश्वामित्र की यज्ञ की रक्षा, यज्ञ विध्वंस करनेवाले राक्षसों का बध, अहिल्या उद्धार, धनुष यज्ञ आदि प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया. श्री पाठक ने कहा कि त्रिकालदर्शी विश्वामित्र को पता था कि प्रभु श्रीराम को आनेवाले समय में वनवास होगा और इस दौरान उन्हें रावण और उनके शक्तिशाली राक्षसों से युद्ध करना होगा. इसको ध्यान में रखते हुये विश्वामित्रजी ने उसके अनुकूल शस्त्र शिक्षा से दोनों भाइयों को पारंगत कराया था. इतना ही नहीं, उन्होंने दोनों भाइयों को वन में जीवन बिताने के तरीके भी बताये थे. विश्वामित्रजी ने श्रीराम-लक्ष्मण को जंगल के विभिन्न वनस्पतियों और कंद-मूल की भी पहचान करायी थी, जिसको खा लेने के बाद कई दिनों तक भूख-प्यास नहीं लगती है और शरीर को काफी बल भी मिलता है. संत तुलसीदास ने जाते लाग न क्षुधा पिपासा, अतुलित बल तनु तेज प्रकासा… चौपाई के माध्यम से इसका वर्णन किया है. महर्षि विश्वामित्र की यह सीख प्रभु श्रीराम को अपने वनवास काल में काफी काम आयी. कथा के दौरान श्रोता अहिल्या उद्धार की कथा सुनकर काफी भाव-विभोर हो गये. बीच-बीच में शिवपूजन व्यास ने विभिन्न भजनों के माध्यम से रामकथा को सरस बनाया. इस दौरान उपेंद्र शर्मा ने सह गायक और राम सुंदर राम ने नाल पर, नंदू ठाकुर, अशोक विश्वकर्मा और अनिल विश्वकर्मा ने झाल पर संगत किया. अखिलेश कुशवाहा ने संचालन किया. इस अवसर पर रामाधार ठाकुर, सरयू चंद्रवंशी, ट्रस्टी मिथिलेश् कुशवाहा, संत कुमार, मुंद्रिका ठाकुर, सुनील विश्वकर्मा, उदय कुमार, ओम समिति के अध्यक्ष चंद्रमणि कुमार, अजीत शर्मा, शोभा पाठक, सुनीता देवी, उर्मिला देवी, शकुंतला देवी, सुप्रिया कुमारी, प्रियंका ठाकुर सहित काफी संख्या में महिला-पुरूष श्रोता उपस्थित थे.












