Location: Manjhiaon
चंद्री स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित दो दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दौरान प्रवचनकर्ता भक्ति सिद्धांत प्रभु ने कहा कि भगवान को भक्ति के माध्यम से ही पाया जा सकता है। भगवान अपने भक्तों की हर संभव सहायता करते हैं तथा भगवान के नाम का महत्व स्वयं भगवान से भी बढ़कर है।
उन्होंने कहा कि हम सभी प्राणी भगवान के नाम के वास्तविक महत्व को पूरी तरह समझ नहीं पाते हैं। श्रीकृष्ण भगवान चैतन्य महाप्रभु के रूप में अवतरित हुए और नाम जप के माध्यम से मानव कल्याण का मार्ग बताया। भगवान का नाम लेने से शरीर और मन के सभी क्लेश दूर हो जाते हैं, लेकिन लोभ, मोह, काम, क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष और अहंकार जैसे दोष मनुष्य को भगवान को समझने से रोकते हैं।
सिद्धांत प्रभु ने कहा कि जिस दिन मनुष्य भगवान की शरण में चला जाता है, उसी दिन से उसे आंतरिक सुख और शांति की प्राप्ति होती है। कलियुग में भगवान के नाम का जप ही मोक्ष का एकमात्र साधन है। श्रद्धा और आदर के साथ भगवान का नाम लेने से जीवन की सभी बुराइयां समाप्त हो जाती हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि दिन में कम से कम एक घंटा भगवान के नाम का जप अवश्य करें।
कथा के उपरांत सामूहिक हरिकीर्तन का आयोजन किया गया, जिसमें महिला, पुरुष, बच्चे और वृद्ध सभी श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए। इस दौरान पुष्प वर्षा की गई, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। अंत में महाप्रसाद वितरण के साथ दो दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का समापन हुआ।











