बिहार में वोटिंग से पहले मतदाताओं का मूड और समीकरण जानिए

Location: रांची

रांची : बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर पहले चरण का मतदान गुरुवार को होगा। चुनाव परिणाम की सही जानकारी तो 14 नंबर को ही मिलेगी। लेकिन बिहार के मतदाताओं का जो मूड और चुनाव पूर्व रुझान मिला है, उससे माना जा रहा है कि एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की लड़ाई है। प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज अधिकांश सीटों पर मुख्य मुकाबले से बाहर दिख रही है। हां यह तीसरी नंबर की पार्टी जरूर है। इस पार्टी की चर्चा है। इसके मुद्दे और वादे को भी लोग सही मानते हैं। लेकिन फिलहाल वोट देने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए माना जा रहा है कि प्रशांत किशोर को अभी और संघर्ष व इंतजार करना पड़ेगा। जातीय गोलबंदी के कारण यहां मतदाताओं का ध्रुवीकरण एनडीए व महागठबंधन के बीच में ही है। इसलिए लड़ाई इन्हीं दोनों के बीच है। कांटे की लड़ाई होने के बावजूद एनडीए का पलड़ा थोड़ा भारी है। यदि रुझान और मूड वोट में बदला तो एनडीए बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। सीटों की संख्या के हिसाब से प्रदर्शन 2015 और 20 20 के मुकाबले बेहतर रह सकता है। इधर, महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव द्वारा की जा रही लगातार लोक-लुभावन घोषणाओं का असर भी मतदाताओं पर दिख रहा है। तेजस्वी रोज नए-नए वादे कर रहे हैं। सरकारी नौकरी देने की घोषणा से युवाओं का बड़ा वर्ग का समर्थन महागठबंधन को मिलने की उम्मीद है। तेजस्वी को अपनी घोषणाओं पर भरोसा है। उन्हें ऐसा लगता है कि इन घोषणाओं से प्रभावित होकर जनता साथ देगी। कई राज्यों में मुफ्त की रेवड़ी की घोषणाएं कारगर साबित हो चुकी है। इसलिए तेजस्वी को अधिक भरोसा है। अगर घोषणाओं का असर अधिक हुआ तो बाजी पलट जाएगी। मगध और शाहाबाद क्षेत्र में कड़े मुकाबले के बावजूद इस बार एनडीए को लाभ मिल सकता है। इन दोनों क्षेत्रों में 20-20 के चुनाव में महागठबंधन को एक तरफा बढ़त मिली थी। लेकिन इस बार स्थिति वैसी नहीं है। यहां एनडीए मजबूत दिख रहा है। कई सीटों पर बागी उम्मीदवार भी खेल बिगड़ने को तैयार हैं। महागठबंधन के मुकाबले एनडीए ज्यादा एकजुट है। जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार करीब एक दर्जन सीटों पर आपस में ही लड़ रहे हैं। इसका फायदा एनडीए को मिल सकता है। टिकट बंटवारे में भी एनडीए के मुकाबले महागठबंधन में ज्यादा गड़बड़ी का आरोप है। तेजस्वी ने मनमानी तरीके से टिकट दिया। इसका असर भी चुनाव परिणाम पर दिख सकता है। इधर, मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या का असर भी कुछ सीटों पर पड़ सकता है। माना जा रहा था कि इस बार यादव समाज तेजस्वी के साथ पहले की तरह एकजुट नहीं है। यादवों का वोट एनडीए को भी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन अब यह देखना होगा कि दुलारचंद यादव की हत्या के बाद यादव समाज एकजुट रहता है या फिर बिखरता है।

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  • Sunil Singh

    Sunil Singh is Reporter at Aapki khabar from Ranchi, Jharkhand.

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