Location: Garhwa
बिहार चुनाव 2025: विकास, सुरक्षा और बदलाव के मुद्दों पर केंद्रित प्रचार
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में प्रचार का स्वरूप पूरी तरह मुद्दों के इर्द-गिर्द रहा है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाला है, जबकि विपक्षी महागठबंधन की ओर से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव मुख्य चेहरा हैं। तीनों नेताओं ने अपने-अपने तरीकों से मतदाताओं को साधने की कोशिश की है।
मोदी का फोकस विकास और कल्याण योजनाओं पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में “डबल इंजन सरकार” को बिहार के विकास की गारंटी बताया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं—उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, जनधन, प्रधानमंत्री आवास—का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे गरीबों, महिलाओं और किसानों को सीधा लाभ मिला है।
हाल ही में महिलाओं के खातों में वित्तीय सहायता राशि ट्रांसफर कर मोदी ने महिला मतदाताओं तक पहुंच बनाने का प्रयास किया।
अपने भाषणों में उन्होंने पूर्ववर्ती राजद शासन को “जंगल राज” बताते हुए कानून-व्यवस्था के मुद्दे को भी उठाया। मोदी का प्रचार “स्थिरता और विकास” की लाइन पर रहा है।
अमित शाह ने सुरक्षा और घुसपैठ का मुद्दा उठाया
गृहमंत्री अमित शाह ने अपने संबोधनों में सुरक्षा को चुनाव का मुख्य विषय बनाया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष सत्ता में आता है, तो बिहार “घुसपैठ और अपराध” की समस्या से जूझेगा। शाह ने लालू प्रसाद यादव के शासनकाल को याद दिलाते हुए “जंगल राज” की वापसी का खतरा बताया।
उनकी रैलियों में सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता से जुड़े मुद्दों पर जोर रहा। शाह का संदेश रहा कि भाजपा के नेतृत्व में ही राज्य सुरक्षित और स्थिर रह सकता है।
तेजस्वी यादव ने रोजगार और बदलाव को मुद्दा बनाया
महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने इस चुनाव में “रोजगार” और “बदलाव” को मुख्य एजेंडा बनाया। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में बिहार से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है और युवाओं को नौकरी नहीं मिली। तेजस्वी ने “मां-बहन-मान योजना” की घोषणा की, जिसके तहत उनकी सरकार बनने पर महिलाओं को ₹2,500 प्रतिमाह देने का वादा किया गया है।
उन्होंने एनडीए सरकार पर आरोप लगाया कि विकास के नाम पर सिर्फ घोषणाएं की गईं, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग क्षेत्र में सुधार नहीं हुआ। तेजस्वी ने खुद को “नए बिहार” का प्रतिनिधि बताया और कहा कि वे पुरानी राजनीति से दूरी बनाना चाहते हैं।
मुख्य चुनावी प्रवृत्तियां
इस चुनाव में एनडीए की रणनीति विकास और कल्याण योजनाओं के साथ सुरक्षा के मुद्दों को जोड़ने पर केंद्रित रही है। वहीं महागठबंधन ने बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असमानता को प्रमुख विषय बनाया है।
महिला और युवा मतदाता दोनों गठबंधनों के लिए निर्णायक भूमिका में हैं। मोदी सरकार की कल्याण योजनाएं और तेजस्वी के रोजगार वादे इन वर्गों को प्रभावित करने का प्रयास है
बिहार चुनाव 2025 का मुकाबला विकास बनाम बदलाव के बीच दिखाई दे रहा है।
एनडीए “स्थिरता और सुशासन” का संदेश दे रहा है, जबकि महागठबंधन “नया बिहार” और “युवा नेतृत्व” की बात कर रहा है।
मतदाता अब यह तय करेंगे कि वे मौजूदा नीतियों को जारी रखना चाहते हैं या बदलाव के पक्ष में मतदान करेंगे।











