Location: Garhwa
रांची: काफी जदोजहद, रूठने-मनाने और लंबी बैठकों के बाद बिहार एनडीए में सीटों का बंटवारा हो गया। सहयोगी दलों की एकजुटता बरकरार रखने के लिए भाजपा और जनता दल यूनाइटेड को कुर्बानी देनी पड़ी।2020 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले जनता दल यूनाइटेड को 14 सीटों का और भाजपा को 9 सीटों का नुकसान हुआ है। 2020 के चुनाव में जनता दल यूनाइटेड को 115 और भाजपा को 110 सीट मिली थी। जबकि इस बार भाजपा- जेडीयू को 101-101 सीट मिली है। यानी अब कोई बड़ा भाई, छोटा भाई नहीं रहा। सीटों की संख्या के हिसाब से भाजपा-जदयू बराबर हैं। सीटों के बंटवारे में एक बार फिर लोजपा (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान मोलतोल करने में सफल रहे हैं। लोकसभा चुनाव में पांच सीट मिलने के बाद अब विधानसभा में भी चिराग ने दबाव की राजनीति के तहत 29 सीटें हथिया ली हैं। सीट बंटवारे में चिराग पासवान को लाभ हुआ है। चिराग की दबाव की राजनीति सफल रही। जबकि हम और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी को 6-6 सीट देकर एनडीए में दोनों को बराबरी का हिस्सा मिला है। हालांकि पिछले चुनाव के मुकाबले हमको भी एक सीट का नुकसान हुआ है। जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी दूर करने के लिए दोनों को बराबर सीट दी गई ताकि कोई अपने को उपेक्षित महसूस न करे। एनडीए के रणनीतिकारों ने भाजपा और जदयू के साथ-साथ हम और रालोमो बराबर बराबर की हिस्सेदारी देकर बड़ा भाई छोटा भाई का फासला खत्म किया है। बहरहाल सीटों के बंटवारे को लेकर जो विवाद और कयासों का दौर पिछले कई दिनों से चल रहा था वह अब खत्म हो गया है। सीटों के बंटवारे में एनडीए महागठबंधन से आगे निकल गया है। महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सहयोगी दलों में सहमति नहीं बन पाई है। तनातनी जारी है।











