दोषियों को नाम उजागर करें, पूरे यूट्यूब पत्रकार वर्ग को कटघरे में खड़ा करना अनुचित

Location: Garhwa

गढ़वा में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की हालिया बैठक में निजी अस्पतालों से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा के दौरान कुछ गंभीर बिंदु सामने आए। बैठक में यह आरोप लगाया गया कि कुछ यूट्यूब पत्रकार निजी अस्पतालों से पैसे मांगते हैं और मना करने पर धमकी देकर भ्रामक खबरें चलाते हैं। इस तरह की घटनाएं यदि सत्य हैं, तो निश्चित रूप से निंदनीय हैं और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

लेकिन इसके साथ ही दोषी का नाम लिए बजाय समस्त यूट्यूब पत्रकारके इस कतार में शामिल करना, एक अत्यंत खतरनाक और गैर-जिम्मेदाराना बयान है। पत्रकारिता की किसी भी धारा — चाहे वह मुख्यधारा हो या डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म — उसमें गलत तत्व हैं, ऐसा मैं भी महसुस करता हूं, लेकिन दोषी को चिन्हित किए बिना पूरे वर्ग को बदनाम करना न केवल अनुचित है, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी खतरनाक संकेत है।

कोरोना महामारी के दौर को याद करें। जब कई परंपरागत मीडिया संस्थान मैदान से दूर थे, तब यही यूट्यूब पत्रकार सीमित संसाधनों में आम जनता की आवाज़, अस्पतालों की स्थिति और सिस्टम की खामियों को सामने ला रहे थे। ऐसे में, आज उन्हीं यूट्यूब पत्रकारों पर संदेह की उंगली उठाना, वह भी बिना ठोस प्रमाण के, न सिर्फ उनके कार्य के प्रति असम्मान है, बल्कि वैकल्पिक पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर हमला भी है।

अगर कोई यूट्यूबर दोषी है, तो उसका नाम सार्वजनिक किया जाए, उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया चलाई जाए। लेकिन बिना प्रमाण सब पर आरोप मढ़ना एक तरह की बौद्धिक लापरवाही है। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई हो — इसमें कोई दो राय नहीं — लेकिन निर्दोषों को सामूहिक रूप से बदनाम करना उससे भी बड़ी गलती होगी।

यह भी जरूरी है कि IMA और चिकित्सक समुदाय आत्मचिंतन करें। सवाल यह भी है कि ऐसी स्थिति आखिर क्यों उत्पन्न हो रही है? क्यों आए दिन निजी अस्पतालों पर अव्यवस्था, लापरवाही या वसूली जैसे आरोप लगते हैं? समाज में डॉक्टरों को “भगवान का रूप” कहा जाता रहा है, परंतु यदि आम जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है, तो इसकी वजहों को समझना भी उतना ही जरूरी है।

IMA को एकपक्षीय निष्कर्ष देने के बजाय तथ्यों पर आधारित, संतुलित और पारदर्शी रवैया अपनाना चाहिए। साथ ही, यह भी ध्यान रखना होगा कि पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पक्षों — पत्रकारों और चिकित्सकों — पर समान रूप से लागू होती है।

, दोषियों को बचाया न जाए, पर निर्दोषों को भी बलि का बकरा न बनाया जाए। सार्वजनिक मंचों पर सभी यूट्यूब पत्रकारों को कटघरे में खड़ा करना न सिर्फ पत्रकारिता के विरुद्ध है, बल्कि एक संकुचित सोच का परिचायक भी है, जिससे बचा जाना चाहिए।


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  • Vivekanand Upadhyay

    Location: Garhwa Vivekanand Updhyay is the Chief editor in AapKiKhabar news channel operating from Garhwa.

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