Location: Garhwa
नई दिल्ली | 15 जनवरी 2026
दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के हॉल नंबर–2 स्थित लेखक मंच पर एकलव्य प्रकाशन द्वारा प्रकाशित उपन्यास ‘नाच’ का विमोचन सह परिचर्चा आयोजित की गई। परिचर्चा का विषय था—
“नाच उपन्यास : लोक नाट्य एवं इतिहास के कुछ विस्मृत पन्ने”।
कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सोनिका कौशिक, वरिष्ठ आलोचक डॉ. एम. के. पांडेय, शांतिनिकेतन के शोधार्थी पुनेश पार्थ, एकलव्य प्रकाशन के संपादक शिवनारायण गौर एवं सीमा तथा उपन्यास के लेखक नवनीत नीरव उपस्थित रहे।
परिचर्चा में उपन्यास नाच के माध्यम से लोक नाट्य की परंपराओं पर चर्चा की गई। विशेष रूप से पूर्वांचल क्षेत्र में प्रचलित लौंडा नाच की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
डॉ. एम. के. पांडेय ने लोक नाट्य परंपरा की चर्चा करते हुए भिखारी ठाकुर की विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने लोक नाट्य में जेंडर और सेक्सुअलिटी से जुड़े पहलुओं को समझने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि उपन्यास में लोक कलाकार द्वारा नारी वेश धारण कर कला-प्रस्तुति की प्रक्रिया का सूक्ष्म वर्णन किया गया है।
प्रोफेसर सोनिका कौशिक ने कहा कि उपन्यास में कई ऐसे तत्व हैं जो उनके लिए नए हैं। उन्होंने लोक भाषा के सहज प्रयोग की सराहना करते हुए कहा कि इससे कथा का प्रवाह प्रभावित नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उपन्यास पाठक को पढ़ने का आनंद देता है। जेंडर के साथ-साथ उन्होंने मुख्य पात्र सरोज और उसके पिता के बीच के संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया।
शोधार्थी और लोक नाट्य कलाकार पुनेश पार्थ ने कहा कि लोक कला को दर्शक पसंद करते हैं, लेकिन कलाकारों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिल पाता।
उल्लेखनीय है कि उपन्यास नाच के लेखक नवनीत नीरव, शिक्षाविद एवं साहित्यसेवी डॉ. नथुनी पांडेय आजाद के पुत्र हैं। डॉ. आजाद झारखंड के गढ़वा जिले स्थित एस.एस.जे.एस. नामधारी महाविद्यालय में गणित विभाग के विभागाध्यक्ष रहे हैं तथा संस्कार भारती के झारखंड प्रांत में साहित्य विधा संयोजक का दायित्व भी निभा चुके हैं।
कार्यक्रम का समापन साहित्य और लोक संस्कृति के संरक्षण से जुड़े विमर्श के साथ हुआ। श्रोताओं की सहभागिता भी उल्लेखनीय रही।











