Location: रांची
रांची/ गढ़वा जनता और मजदूरों की आवाज पूर्व मंत्री ददई दुबे की शवयात्रा रांची से आज सुबह पलामू और गढ़वा पहुंची। अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए शवयात्रा के मार्ग में लोगों की भीड़ उमड़ी। शवयात्रा डाल्टनगंज, पड़वा मोड़, रेहला होते हुए गढ़वा पहुंची। रास्ते में सड़क किनारे खड़े होकर और अंतिम यात्रा को रोक लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। पूरे रास्ते में हजारों की भीड़ अपने प्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिए खड़ी दिखी। भीड़ ददई दुबे अमर रहे सहित कई नारे लगा रही थी। लोगों की आंखें नम थीं और माहौल गमगीन था।
ददई दुबे इस तरह अचानक अपने लोगों को छोड़कर देवलोक गमन कर जाएंगे किसी को यकीन नहीं हो रहा था। बीमार होने की खबर भी अधिकांश लोगों को नहीं मिली। सीधे निधन की सूचना ही मिली। सूचना मिलते ही पूरे पलामू प्रमंडल में शोक की लहर छा गई।
गढ़वा में ददई दुबे के पार्थिव शरीर को पुलिस प्रशासन की ओर से श्रद्धांजलि के साथ-साथ सलामी दी गई। गढ़वा में उनके पार्थिव देह पर फूल माला अर्पित करने के लिए धक्का मुक्की की स्थिति रही। दलीय राजनीति की दीवारें टूट गई। सभी दलों के नेता और कार्यकर्ता श्रद्धांजलि देने पहुंचे। दुबे जी के निधन से सभी दुखी थे। पलामू प्रमंडल ने अपने एक धरतीपुत्र को खो दिया था। ऐसा धरतीपुत्र जिसने एक अत्यंत पिछड़े गांव से निकलकर दिल्ली की संसद तक जनता और मजदूरों के हित में आवाज बुलंद की। ददई दुबे न कभी झुके, न कभी टूटे, और न कभी किसी से डरे। अपनी बात बेबाकी से रखते रहे। इनकी यही खासियत थी।
गढ़वा से इनके पैतृक गांव चोका बलिहारी, फिर कांडी प्रखंड से लेकर भवनाथपुर और नगर ऊंटरी से लेकर उत्तर प्रदेश की सीमा तक लोगों ने ददई दुबे को अंतिम विदाई दी। पूरे दिन उनकी अंतिम यात्रा पलामू और गढ़वा में घूमती रही। हर तरफ भीड़ और गम का नजारा। श्रद्धांजलि देने के लिए लोग घंटों सड़क किनारे खड़े रहे। आज रात उनका वाराणसी में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पलामू और गढ़वा जिले में शवयात्रा में जिस तरह से भीड़ उमड़ी उससे यह साबित हुआ कि ददई दुबे लोगों में कितने लोकप्रिय थे। यहां के लोगों ने अपने प्रिय नेता को नम आंखों से विदा कर उनका कर्ज उतारने का प्रयास किया। उनके निधन से पलामू की राजनीति में जो शून्यता आई है उसकी भरपाई करना मुश्किल है।
# जन नेता को कोटि-कोटि नमन











